चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय प्रताप नगर सेवा केंद्र पर राजयोगिनी आशा दीदी ने श्री गणेश जी का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि हम अपने विघ्नों का विनाश करने के लिए स्वयं श्री गणेश जैसा बनें। उन्होंने कहा कि श्री गणेश जी जो प्रथम पूजनीय है उनकी जन्म कहानी हम सब जानते हैं। गणेश जी का विशाल मस्तक दिव्य बुद्धि छोटी आंखें दूर दृष्टि दूर तक देख सकते हैं दूरदर्शी छोटा मुख कम बोलना और बड़े कान सूप जैसे कोई भी बात अंदर जाएं तो अच्छी बात अंदर जाए और जो कचरा है वह बाहर ही रह जाए। बड़ा पेट सबको एक्सेप्ट करें सब की बातें सुन यहां की बात वहां ना फैलाएं। उन्होंने बताया उनके एक हाथ में कुल्हाड़ी है मतलब बुरी आदतों को बुरे संस्कारों को हमें स्वयं काटना है रस्सी मर्यादाओं का प्रतीक है। वरद हस्त सबके लिए दुआएं देना शुभकामना और एक हाथ में मोदक पकड़े हुए हैं जीवन में जो भी है मेहनत करते हैं परिश्रम करते हैं इसका लाभ स्वयं ना ले उनकी सवारी चूहा जो सारा दिन कुछ ना कुछ काटता रहता है काटता रहता है तो हमारे कर्म इंद्रियां जो सारा दिन कुछ भी देख रहे कुछ भी खा रहे हैं इस पर हमें अपना कंट्रोल हो । इस प्रकार गणेश जी हमें जीवन जीने की सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने बताया कि श्री गणेश जी से प्रेरणा लेकर हम भी अपने जीवन के विघ्नों को विनाश करें।