इंदौर। रविवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इंदौर पहुंचे। यहां एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि वे सनातियों को एकजुट करने के लिए पदयात्रा निकालेंगे। यह दस दिवसीय यात्रा 21 से 30 नवंबर तक आयोजित होगी। वक्फ बोर्ड को लेकर कहा कि मनमानी करने वालों की अब नहीं चलेगी। शास्त्री इंदौर से महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन रवाना हुए। उनके साथ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि यह यात्रा बागेश्वर धाम से ओरछा स्थित राम राजा सरकार के मंदिर तक जाएगी। पंडित धीरेंद्र शास्त्री 21 नवंबर को बागेश्वर धाम तीर्थ से अपनी यात्रा शुरू करेंगे और प्रतिदिन 20 किलोमीटर चलेंगे। वह 30 नवंबर को 160 किमी की यात्रा कर ओरछा पहुंचकर अपनी यात्रा का समापन करेंगे।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने पदयात्रा में शामिल होने वाले अनुयायियों से यह अपील की है कि वे पहले रजिस्ट्रेशन करवा लें, जिससे भोजन प्रसादी और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अभी से इंतजाम किया जा सके। यात्रा में दस हजार से अधिक अनुयायी और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
पं. धीरेंद्र शास्त्री ने ये भी कहा कि जो अनुयायी 8 दिनों तक यात्रा में साथ चलेंगे, वे अपने साथ कंबल, बिस्तर और थाली लेकर जरूर आएं। जो अनुयायी रजिस्ट्रेशन कराएंगे, इसी रजिस्ट्रेशन के आधार पर उनकी व्यवस्था की जाएगी।
यात्रा में सबसे आगे बागेश्वर धाम से केसरिया ध्वज निकलेगा, जो समापन अवसर पर ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर में विधि-विधान के साथ चढ़ाया जाएगा।
हिंदुओं को बंटने से रोकना है मुख्य उद्देश्य
पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वर्तमान में हिंदू समाज बंट रहा है। और बंटने के कारण मिट रहा है। उन्हें एकजुट करने के लिए यह यात्रा निकाल रहे हैं। बागेश्वर धाम से ओरछा सहित कुल चार पदयात्राएं निकालेंगे। इनमें दिल्ली से वृंदावन, लखनऊ से अयोध्या, वेल्लोर से तिरुपति बालाजी भी शामिल है। हालांकि इनकी तारीख अभी तय नहीं है।