चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि हमें ना सिर्फ़ मानव जाति से वरन प्राणी मात्र से प्रेम, प्रीति रखते हुए सबके साथ मैत्री पूर्ण व्यवहार करना चाहिए एवम् किसी के भी प्रति मन में वैर भाव नहीं रखना चाहिए तथा यदि हम समर्थ हैं तो जरूरत मंद को कुछ ना कुछ देकर उन्हें साता उपजानी चाहिए तथा प्रथम तो हमें किसी से ऋण नहीं लेना चाहिए, यदि कारणवश ले लिया है तो उसे समय पर चुकाने का पूरा ध्यान रखना चाहिए एवम् लिए गए ऋण को हड़पने का विचार भी कभी मन में नहीं लाना चाहिए। साथ ही हमेशा दूसरों के लिए मन में सदचिंतन करते हुए उनकी भलाई में सहायक बनते रहना चाहिए एवम् अपने मन में चिंताओं को जगह नहीं देनी चाहिए क्यों कि ज्ञानी कहते हैं कि चिता तो मुर्दे को जलाती है परन्तु चिंता जीवित आदमी को तिल तिल कर जलाने का काम करती है अतः अपने अंदर रही हुई चिंता, परेशानी को अपने विश्वस्त सहयोगी के सामने प्रकट करके उसका समाधान प्राप्त करने का प्रयास करते हुए यथासमय अपनी चिंता दूर करने के प्रति जागरूक रहना चाहिए। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने कहा कि मोक्ष की साधना करने के लिए सबसे पहले मोह को त्यागना ज़रूरी है। धर्म सभा में साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने स्वीटी भड़कत्या को 15 एवम् प्रकाश श्री श्री माल को 9 उपवास तथा अन्य प्रत्याख्यांन ग्रहण कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। सभी के द्वारा बड़ी तपस्या की खूब खूब अनुमोदना की गई ।तेजस लोढ़ा ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन वरिष्ठ श्रावक नारायण लाल खटोड़ ने किया।