मनासा। तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पिपलिया हाड़ी के डेरा नंबर 1 से शमशान घाट तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं बन सका है। जिसके कारण अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।गौरतलब है कि ग्राम पंचायत पिपलिया हाड़ी में डेरा नम्बर 1 के ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए सालो पहले पंचायत द्वारा शासकीय भूमि पर श्मशान घाट का निर्माण तो करा दिया गया था, परंतु शमशान तक रास्ता नहीं बन सका। जिसके कारण लोगों को परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परेशानी उस समय ज्यादा बढ़ जाती है जब खेतों में फसल लगी हो या फिर बरसात का मौसम हो, लोगो को नदी पार कर श्मशान घाट जाना पड़ता है। शमशान तक रास्ता बनाए जाने के लिए ग्रामीण कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक रास्ता नहीं बन सका है। गांव के पास बने मुक्तिधाम पर अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए जाने वाले लोगों को नदी और झाड़ियों के बीच काफी संभलकर निकलना पड़ता है, क्योंकि मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को वेस्टवेयर और नदी से होकर निकलना पड़ता है। कई बार तो अर्थी ले जाने वाले लोगों के फिसलने के कारण अर्थी के गिरने की स्थिति तक बन जाती है। रास्ते में अर्थी न गिरे इसके लिए अर्थी के आसपास लोगों को ध्यान रखने के लिए चलना पड़ता हैं। मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए ग्रामीण सर्दी व गर्मी के मौसम में जैसे-तैसे निकल जाते हैं परंतु बरसात के मौसम में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है, क्योंकि बरसात के मौसम में खेतों में और नदी में पानी भरा होने के कारण लोगों का मेड़ों पर चलना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में लोगों को खेतों से होकर नदी के पानी के बीच से होकर निकलना पड़ता है, क्योंकि मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए इसके अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।
बीते बुधवार को पिपलिया हाड़ी के डेरा नंबर 1 से विजयसिंह पिता छगनलाल मालवीय की शव यात्रा नदी से होकर निकली जिसके बाद ग्रामीणों ने रास्ते की मांग को लेकर प्रशासन से गुहार लगाई है।