नीमच। सरकार और सामाजिक संस्थाएं भले ही पर्यावरण संरक्षण के लिए लाख कोशिश करे, लेकिन कुछ लोगों की लापरवाही अनदेखी और करनी के चलते पूरी योजना पर पलीता लग जाता है। ऐसा ही एक उदाहरण नीमच के जैन सोशल ग्रुप द्वारा डेवलप की गई संस्कार वाटिका का है। यह वाटिका करीब 3 वर्ष पूर्व नेशनल हाईवे महू नसीराबाद क्रमांक 79 ग्वालटोली-स्पेंटा रोड पर वर्मा तोल कांटे के यहां स्थित है। जिसे विधायक दिलीप सिंह परिहार और तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जैन सोशल ग्रुप संस्कार को ग्रीन बेल्ट डेवलप करने के लिए आवंटित की गई थी। ग्रुप के सदस्यों द्वारा संस्कार वाटिका को निरंतर श्रमदान करके विकसित किया गया। पेड़ पौधे लगाए गए। पानी की टंकी लगाई गई। पक्षियों के दाने पानी की व्यवस्था की गई। यह क्रम निरंतर जारी है। लेकिन यहां पर स्थित तोल कांटे पर आवाजाही करने वाले भारी वाहन इस पूरी वाटिका को गाड़ी इधर उधर करने में तहस-नहस कर देते हैं। आए दिन इसकी फेंसिंग तोड़ देते हैं। जैन सोशल ग्रुप संस्कार के राजेश गोखरू और प्रदीप ओसवाल ने बताया कि वाहनों के आगे पीछे करने की वजह से वाटिका की एंगल उखड़ जाती है। वाटिका की सुरक्षा को भारी नुकसान होता है। जिसे लेकर संस्कार ग्रुप के सदस्यों द्वारा वाहन चालक और जिम्मेदारों को समझाइश भी दी गई। लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। आए दिन वाटिका की तार फेंसिंग और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। तार फेंसिंग के टूट जाने के कारण मवेशी वाटिका में प्रवेश कर जाते हैं, और यहां पर लगे पेड़ पौधों को खा जाते हैं। ग्रुप के सदस्यों द्वारा आए दिन वाटिका में लगी तार फेंसिंग और एंगल आदि को दुरुस्त भी कराया जाता है। लेकिन यह आए दिन की कहानी हो गई है। संस्कार ग्रुप का कहना है कि हम परेशान हो चुके हैं। या तो वाटिका के संरक्षण का कोई ठोस उपाय ढूंढा जाए, जिम्मेदारों को सख्त निर्देश दिए जाए और नुकसान की भरपाई करवाई जाए या फिर वाटिका की जिम्मेदारी शासन हमसे वापस ले ले। हमने इस बारे में अधिकारियों से भी शिकायत की लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई, हमारी समस्या का समाधान नहीं मिला।गौरतलब है कि नीमच में वैसे ही गिनती के ग्रीन बेल्ट विकसित किए जा रहे है, और उनकी भी इस तरह दुर्गति हो जाएगी तो फिर कौनसी सामाजिक संस्थाएं जिम्मेदारी लेगी।