उज्जैन। चार माह विश्राम के बाद भगवान श्रीहरि विष्णु 14 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी के दिन पुनरू सृष्टि का भार संभालेंगे। चार माह से सृष्टि का संचालन कर रहे भगवान शिव यह भार उन्हें सौंपेंगे। हरि-हर मिलन के इस दुर्लभ क्षण का नजारा श्रद्धालुओं को आनंदित कर देने वाला होता है।
गुरुवार रात 11 बजे भगवान महाकाल चांदी की पालकी में विराजमान होकर श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर जाएंगे। यहां हरि से हर का अनूठा मिलन होगा। दोनों देवों को अपने-अपने स्वभाव के विपरीत मालाएं धारण कराकर महाआरती की जाएगी। पूजन के बाद बाबा महाकाल की सवारी देर रात को वापस महाकाल मंदिर के लिए रवाना होगी। जिला व पुलिस प्रशासन के साथ मंदिर प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।
साल में एक बार बैकुंठ चतुर्दशी पर भगवान महाकाल और गोपाल जी के बीच होने वाले हरिहर मिलन के दौरान हजारों की संख्या में दर्शनार्थी गोपाल मंदिर के बाहर मौजूद रहते है। देर रात्रि में श्री महाकालेश्वर मंदिर से भगवान महाकाल चांदी की पालकी में विराजित होकर श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर के लिए रवाना होंगे। इस दौरान सवारी मार्ग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए मौजूद रहते है।
वहीं गोपाल मंदिर के सामने हरि और हर का मिलन देखने श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। जिला प्रशासन के माध्यम से सवारी मार्ग में बैरिकेडिंग की जाएगी। बाबा महाकाल की सवारी के लिए महाकाल मंदिर प्रशासन ने मंदिर के अधिकारी, कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। वहीं सवारी मार्ग में लाइटिंग, साफ-सफाई की व्यवस्था नगर निगम के माध्यम से की गई है।
यह रहेगा सवारी मार्ग
गुरुवार देर रात करीब 11 बजे भगवान महाकाल की सवारी मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, पटनी बाजार होकर श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर पहुंचेगी। पूजन-अर्चन के बाद देर रात को वापसी में सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार गुदरी चौराहा, महाकाल घाटी होकर मुख्य द्वार से मंदिर में प्रवेश करेगी।
पटाखें व हिंगोट पर रहेगा प्रतिबंध
बैकुंठ चतुर्दशी को हरि-हर मिलन के लिए महाकाल मंदिर से आने वाली बाबा महाकाल की सवारी में श्रद्धालुओं द्वारा अत्यधिक मात्रा में पटाखें, हिंगोट, राकेट (आतिशबाजी) लापरवाही पूर्वक चलाए जाते है। इसके कारण दुर्घटनाएं भी होती है। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने सवारी मार्ग व गोपाल मंदिर के सामने अधिक संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। वहीं सवारी निकलने के दो घंटे पूर्व से मार्ग में पुलिस बल तैनात किया जाएगा।
सवारी के दौरान रहेंगी ये व्यवस्थाएं
1. महाकाल की सवारी के साथ एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, पुलिस वैन, प्रचार वाहन आदि वाहन साथ चलेंगे।
2. पीए सिस्टम के माध्यम से लोगों को आतिशबाजी नही करने की सूचना दी जाएगी।
3. सवारी मार्ग की प्रत्येक गली के दूसरे छोर पर नो व्हीकल जोन कर सभी गली में पुलिस कर्मी तैनात किए जाएंगे
सिद्धवट पर अर्पित होगा दुध
बैकुंठ चतुर्दशी पर गुरुवार को तीर्थ पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा। देशभर से आने वाले श्रद्धालु ने पितरों की तृप्ति के लिए सिद्धवट शिप्रा तट पर दूध अर्पित करने पहुंचेगें। श्रद्धालुओं द्वारा घाट पर तर्पण, पिंडदान कराया जाएगा। मान्यता है चतुर्दशी पर सिद्धवट पर दुग्ध धारा अर्पित करने से पितृ तृप्त होते हैं। इसी मान्यता के चलते दूरदराज से श्रद्धालु सिद्धवट पर दूध अर्पित करने उज्जैन आते है। वहीं 15 नवंबर शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर शिप्रा के रामघाट पर स्नान होगा।
पं. अमर डब्बावाला ने बताया कि
मान्यता के अनुसार कार्तिक दीप प्रज्वलित कर देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का माह है। इस माह में दीपदान नहीं कर पाने की स्थिति में चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन दीप दान कर पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट कर सकते है। दीप प्रज्वलन करने से सुख, समृद्धि की प्राप्ति होती है। अकाल मृत्यु का नाश होता है और भगवत कृपा से पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है।