नीमच। वृद्धावस्था ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार है। हम चलते फिरते स्कूल है। युवा पीढ़ी हमसे इसका लाभ ले। यह बात प्रसिद्ध साहित्यकार डॉक्टर पूरन सहगल ने मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का विषय था भारत में वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और सुरक्षा।
डॉ. पूरन सहगल ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक श्रेष्ठतम नागरिक है। उन्होंने सलाह दी कि उम्र के इस पड़ाव में हम अपनी आवश्यकताएं कम कर लें। अपनी जिजीविषा को नहीं बढ़ने दे। विष पीने और अमृत बांटने की आदत डालें। उन्होंने खास तौर पर उस पीढ़ी को आगाह किया जो वरिष्ठ नागरिकों को वृद्ध आश्रम में भेजने की परंपरा बना रही है। इस अवसर पर भानु दवे, मनोहर सिंह लोढ़ा, किशोर जवेरिया, डॉक्टर आरके भंडारी ने भी वरिष्ठ नागरिकों के भावनात्मक, सामाजिक, आर्थिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के पहलुओं पर अपने विचार रखें।
वक्ताओं ने वरिष्ठ नागरिकों के प्रति परिवार की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। इस दौरान यह भी विचार सामने आया कि बेटियां बुजुर्गों का खास ध्यान रखती है। कार्यक्रम में ओमप्रकाश बटवाल, गजेंद्र चंद्रावत, अरविंद डूंगरवाल, डॉ मनोहर गुजरिया का बहुमान किया गया। कार्यक्रम का संचालन सत्येंद्र सिंह राठौड़ ने किया।