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January 27, 2025, 12:33 pm
BIG NEWS : राजस्थान के प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ के दरबार में पहुंचा रावण, भक्त ने मांगी थी ऐसी मन्नत, जब भगवान ने 3 घंटे बारिश रोककर पूरी की कामना तो... फिर भक्त ने चढ़ाया कुछ ऐसा..., पढ़े खबर

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चित्तौड़गढ़। सांवलिया सेठ मंदिर में रविवार को एक भक्त ने चांदी से बना रावण का पुतला भेंट किया। यह भक्त दशहरा मेलों के लिए रावण के पुतले बनाता है। पिछले साल निंबाहेड़ा मेले में उसे बारिश के कारण पुतले खराब होने का अंदेशा था। उसने भगवान से बारिश रुकवाने की मन्नत मांगी थी। 3 घंटे तक बारिश रुकी रही और मेला पूरा हुआ। मन्नत के अनुसार उसने 141 ग्राम चांदी का रावण बनाकर सांवरा सेठ को भेंट किया।


मंदिर मंडल के सदस्य संजय मंडोवरा ने बताया- चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी क्षेत्र के रहने वाले छोटूलाल वाल्मीकि (51) रविवार शाम चांदी का रावण लेकर सांवरा सेठ के दरबार में पहुंचे। रावण को मंदिर मंडल के सदस्य के हाथों में दिया। इसके बदले में उनको रसीद काट कर दी गई। परंपरा के अनुसार उपरणा ओढ़ाकर भक्त का स्वागत किया।


बारिश रुकवाने के लिए मांगी थी मन्नत
भक्त छोटूलाल ने बताया- मैं मेलों में रावण बनाने का काम करता हूं। हर साल निंबाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) में नवरात्रि के दिनों में मेला भरता है। पिछले साल निंबाहेड़ा मेले के लिए मुझे रावण के पुतले बनाने का टेंडर मिला था।


12 अक्टूबर 2024 को दशहरा मेला था। मेले में मैंने रावण का 76 फीट का पुतला बनाया था। दशहरा मेले से पहले लगातार 3 दिन तक तेज बारिश हो रही थी। रावण का पुतला बांस और कपड़े से बनाया हुआ था। 11 अक्टूबर को बारिश रुकी, लेकिन बूंदाबांदी जारी रही। 12 अक्टूबर तक भी काम खत्म नहीं हो पाया। बारिश को देखते हुए बहुत परेशान था। लग रहा था मुझे 12 से 15 लाख का नुकसान हो जाएगा।


उस समय सांवरा सेठ को याद किया और कहा कि बारिश रुकी तो मैं उन्हें चांदी का रावण भेंट करूंगा। इसके बाद बारिश पूरी तरह रुक गई। 3 घंटे तक बारिश रुकी रही। इस दौरान पुतलों का बाकी काम पूरा किया और रावण दहन हुआ। रावण दहन के तुरंत बाद रात करीब 8ः30 बजे फिर से बारिश शुरू हो गई, जो अगले दिन यानी 13 अक्टूबर को दोपहर डेढ़ बजे तक जारी रही। बारिश रुकने से मेले का आयोजन सही ढंग से हो पाया।


2016 में मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार
छोटूलाल करीब 12 साल से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा, बड़ी सादड़ी, कपासन, उदयपुर के फतेह नगर, नाथद्वारा (राजसमंद), राजसमंद, पाली, कोटा सहित कई जगहों पर काम किया है। एक साल में लगभग 10 रावण बनाने का ऑर्डर मिल जाता है। उन्हें साल 2016 में जयपुर में राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।


उनके परिवार में दिव्यांग पत्नी किरण (46), बेटी ममता (23), बेटे भीमराज (21) और शुभम (12) है। छोटूलाल का कहना है कि उनका छोटा बेटा शुभम सांवरा सेठ का बहुत बड़ा भक्त है।


हर महीने दर्शन के लिए आते हैं
छोटूलाल ने बताया कि मेरे जीवन में बाबा रामदेव और श्री सांवलियाजी का बड़ा उपकार है। एक समय था जब पैरों में चप्पल पहनने के भी पैसे नहीं हुआ करते थे और कोई मुझे 2 रुपए भी उधारी में नहीं देता था। लेकिन, सांवरा सेठ की कृपा हुई। आज ट्रांसपोर्ट का बिजनेस भी है। बंगला-गाड़ी सब कुछ है।


छोटूलाल का मानना है कि सांवरा सेठ ने ही उन्हें सब कुछ दिया है, इसलिए हर महीने वे दर्शन के लिए आते हैं। ट्रांसपोर्ट कंपनी की हर गाड़ी पर सांवरा सेठ का नाम लिखा हुआ है।


पत्नी ने मोटिवेट किया तो बनाने लगा रावण
भक्त छोटूलाल ने बताया- मैं शादी से पहले पत्थर तोड़ने का काम करता था। शादी के बाद पहली बार पत्नी किरण को बड़ी सादड़ी मेले में घुमाने लेकर गया था। वहां पर रावण के पुतले को देखकर मैंने अचानक से बोल दिया था कि इससे अच्छा पुतला तो मैं बना लेता हूं। पत्नी के साथ जब वापस घर आया तो उसने मुझे चैलेंज करते हुए कहा कि एक छोटा सा रावण बनाकर दिखाइए। जब मैंने बनाकर दिखाए तो पत्नी किरण को वह चीज बहुत अच्छी लगी। किरण ने मुझे मोटिवेट किया और कहा कि आज के बाद आप रावण बनाने का काम करें। तब से मैंने रावण बनाना शुरू किया।

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