मोरवन। बाबा रामदेव मंदिर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आज गुरुवार को समापन हुआ नवनिर्मित मंदिर में वैदिक मंत्रोचार के साथ बाबा रामदेव की प्रतिमा शिव परिवार की स्थापना हुई साथ ही मंदिर पर कलश की स्थापना साथ ही ध्वजा रोहण किया गया इस स्वरणीय पल के साक्षी बने पूरे ग्रामीणों ने अपने प्रतिष्ठान व रोजमर्रा का कार्य बंद कर सभी ने इस महोत्सव में बड़ चड़ कर भाग लिया। महोत्सव की समाप्ति पर आसपास के क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग मंदिर प्रांगण पहुंचे। महोत्सव में चल रही श्रीमद् भागवत का भी गुरुवार को विश्राम हुआ। कथा के अंतिम दिन भी श्रीमद् भागवत का रसपान पाने के लिए भक्तों का सैलाब कथा स्थल पर उमड़ पड़ा।
कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा ने श्रीमद् भागवत कथा का समापन करते हुए कई कथाओं का भक्तों को श्रवण कराया जिसमें भगवान कृष्ण रूक्मणी विवाह,सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथायें सुनाई। इन कथाओं को सुनकर सभी भक्त भाव विभोर हो गए। कथा समापन के दौरान साध्वी प्रेम बाईसा ने भक्तों को भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही जिससे सभी लोग धर्म की ओर अग्रसर हो साथ ही सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों को दोस्ती का महत्व बताया।
साथ ही भक्तो को बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है। कथा में भगवान कृष्ण रुक्मणी की आकर्षक झांकी बनाई गई जो आकर्षण का केंद्र रही। व्यास पीठ से कथा के अंतिम दिन प्रेम बाईसा ने नशा मुक्ति का संदेश देते हुए कहा कि इस संसार में लोग जल में डूबने से नहीं मरते जितने नशे में डूब कर मर जाते हैं। नशा अगर करना ही है तो भक्ति का नशा करो यह नशा कभी नहीं उतरता और यह नशा जीव को भव से पार लगा देता है। नशा आदमी के साथ-साथ पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। आज इस कथा पंडाल से संकल्प लेकर निकले कि हम कोई भी नशीला पदार्थ का सेवन नहीं करेंगे प्रेम बाईसा ने व्यास पीठ से सभी को नशा मुक्ति का संकल्प दिलाया।
महोत्सव के अंतिम दिन क्षेत्र के विधायक ओमप्रकाश सकलेचा कांग्रेस नेता समंदर पटेल जिला पंचायत सदस्य पुरण अहीर जनपत अध्यक्ष गोपाल चारण वकील रामसिंह जाट कथा स्थल पहुंचकर साध्वी जी का स्वागत सम्मान किया। व्यास पीठ से प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में जिन्होंने भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से सेवा प्रदान की है उन्हें सम्मानित किया गया। सात दिनों से सफल कथा का संचालन निलेश रावल लासूर व भरत सेन दड़ौली द्वारा किया गया कथा के समापन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया।