नीमच। संयुक्त परिवार का विघटन रोकने के एक दूसरे के विचारों को सम्मान दें, कम से कम सांध्यकालीन भोजन तो एक साथ बैठकर ही करना चाहिए, इससे घर का माहौल सदैव हल्का रहता है । परिवार के बच्चों को आध्यात्मिक पुस्तकों का गिफ्ट देकर तथा कोई प्रतियोगिता कर प्रोत्साहन पुरूस्कार देते रहना चाहिए’’ उपरोक्त विचार सुप्रसिद्ध प्रेरक वक्ता, दिव्य प्रभा राजयोगिनी बी.के.गीता बहनजी ने ‘‘सुख शांति की ओर कदम.. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किये । खचाखच भरे सद्भावना सभागार में उपस्थित जिले के प्रमुख उच्चाधिकारी, राजनेता एवं प्रतिष्ठित जन बड़ी संख्या में उपस्थित थे । बी.के.गीता बहन ने इन सभी के सम्मुख संकल्प की शक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि हर संकल्प में एक क्रिएटिव एनर्जी होती है जिसे हमें सकारात्मक रूप से प्रयोग में लाना है । जो हम अपने सोच में निरन्तरता लाते हैं वही हमारा स्वरूप बन जाता है, इसलिए हमेशा व्यर्थ और नकारात्मक संकल्पों से बचकर सकारात्मक और शक्तिशाली संकल्पों के लिए नियमित रूप से मेडिटेशन का अभ्यास अवश्य करें । यह आध्यात्मिक प्रयास मन को सही दिशा की और ले जाएगा ।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता व संकल्प सिद्ध योगी राजयोगी बी.के.सूर्य भाई जी के साथ ही बी.के.गीता बहन, बी.के. सविता बहन, फैमिली कोर्ट के विशेष न्यायाधीश कुलदीप जैन, मुख्य न्यायीक दण्डाधिकारी रवि कुमार बोरासी, विधायक दिलीप सिंह परिहार, नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चौपड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष वन्दना खण्डेलवाल, ज्ञानोदय विश्व विद्यालय की कुलाधिपति डॉ. माधुरी चौरसिया, डिप्टी कमाण्डेंय तरंग बंसल, वरिष्ठ भाजपा नेता संतोष चौपड़ा तथा डॉ. अशोक जैन आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया ।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता विश्व प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता बी.के.सूर्य भाई जी ने अपने अति उपयोगी मननशील उद्बोधन में बताया कि हमारे छोटे छोटे संकल्प हमारे जीवन पर बड़ा बड़ा प्रभाव डालते हैं । सुबह उठने से लेकर रात्रि को सोने तक हमारी कार्यशैली, हमारे संकल्पों से संचालित होती है किन्तु मन और उसकी संकल्प शक्ति का यथार्थ ज्ञान न होने के कारण हम मन व बुद्धि को निरंकुश छोड़ देते हैं, परिणाम स्वरूप बेलगाम घोड़े के मुआफिक मन उछल कूद करता है जिससे हमारी आध्यात्मिक शक्तियों का ह्रास होता है । जबकि यही शक्ति संकल्पों की रचनात्मक उर्जा शक्ति से हमें उचाईयों की और ले जा सकती है । आपने अनेक उदाहरणों के साथ बताया कि कैसे कैसे संकल्प की किएटिव एनर्जी का सदुपयोग या दुरूपयोग करके या तो हम अपने जीवन का उत्थान अथवा पतन कर लेते हैं ।
उपरोक्त कार्यक्रम देर रात्रि तक चला जिसका संचालन बी.के.श्रुति बहन ने किया तथा स्वागत भाषण सविता दीदी द्वारा प्रस्तुत किया गया । इसके पूर्व दोपहर में नगर के दशहरा मैदान स्थित टॉउन हॉल में नीमच, मनासा, रामपुरा, जावद, जीरन, मल्हारगढ़, पिपलिया मण्डी एवं नारायरगढ़ आदि स्थानों के 1000 से अधिक नियमित राजयोगी ब्रह्मावत्सों ने 5 घण्टे से अधिक की अखण्ड मौन तपस्या की तथा राजयोगी बी.के.सूर्य भाई जी तथा दिव्य प्रभा ब्रह्माकुमारी गीता बहन जी ने सभी राजयोगी भाई-बहनों को आध्यात्मिक उन्नति के अनेक सरल टिप्स दिये व राजयोग का अभ्यास भी करवाया । इसके पश्चात सभी के लिए ब्रह्माभोजन प्रसादी का आयोजन भी किया गया।