मंदसौर। मालवा का मंदसौर शहर एक बार फिर बेटियों की अस्मिता के लिए एकजुट हुआ। शुक्रवार को मंदसौर में 8 वर्षीय मासूम बालिका से दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की जगह आजीवन कारावास की सजा दिए जाने के विरोध में नगर पूरी तरह बंद रहा। व्यापारी, आमजन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अखंड मंदसौर बंद का समर्थन करते हुए शांतिपूर्वक विरोध दर्ज कराया। सड़कें सूनी रहीं, बाजार बंद रहे और हर वर्ग के लोग बेटी को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतरे।
2018 का है दिल दहला देने वाला मामला-
यह शर्मनाक घटना 26 जून 2018 की है, जब मंदसौर में एक 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दोहरे दुष्कर्म की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। दो दरिंदों ने बच्ची को स्कूल से अगवा कर उसके साथ हैवानियत की हदें पार कर दी थीं। घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर थी।
55 दिन में सुनवाई, फांसी की सजा-
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मंदसौर की अदालत ने इस मामले में रिकॉर्ड 55 दिन में सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट को सौंपा मामला-
बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बिंदुओं पर पुनः विचार के लिए मामला वापस ट्रायल कोर्ट को सौंपा। ट्रायल कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाते हुए फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया, जिससे मंदसौर सहित पूरे प्रदेश में न्यायप्रिय जनता में भारी आक्रोश देखा गया।
सोशल मीडिया से सड़क तक विरोध की लहर-
कोर्ट के इस फैसले का विरोध सिर्फ कोर्ट परिसर या अखबारों तक सीमित नहीं रहा, सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स से लेकर नगर के हर चौराहे तक लोगों ने नाराजगी जाहिर की। सभी का एक ही स्वर था- दरिंदों को फांसी दो!
पीड़ित पिता की पीड़ा-
मासूम बच्ची के पिता ने कहा कि मैं इस फैसले से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं। मेरी बेटी के साथ जो हुआ उसकी सजा केवल फांसी होनी चाहिए। मैं बेटी को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ूंगा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता यशपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि सरकार और अभियोजन पक्ष को फौरन इस फैसले के खिलाफ फिर से अपील करनी चाहिए।
अच्छे व्यवहार के आधार पर रिहाई न हो-
भाजपा जिला उपाध्यक्ष हितेश शुक्ला ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इन दरिंदों को भविष्य में अच्छे आचरण के आधार पर रिहा कर दिया गया तो यह न केवल सिस्टम की विफलता होगी, बल्कि समाज के लिए बड़ा खतरा भी बनेगा।
अपील दायर कर पुनः करेंगे मांग-
डीआईजी रतलाम रेंज मनोज कुमार सिंह ने कहा कि हम फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं, जल्द ही अपील दायर कर पुनः फांसी की मांग करेंगे। अभियोजन की विशेष लोक अभियोजक दीप्ति कनासे ने भी कहा है कि इस फैसले को चुनौती दी जाएगी।