नीमच। अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर शनिवार को नीमच नगरी श्रद्धा, आस्था और भावनाओं के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। दस दिनों तक घर-घर और पंडालों में विराजमान रहे विघ्नहर्ता श्री गणेश को भक्तों ने अश्रुपूरित नेत्रों से विदा किया।
संजीवनी नाला स्थित विसर्जन कुंड और जयसिंहपुरा के शिवघाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के बीच गणेश मूर्तियों का विधिवत विसर्जन किया। इस अवसर पर वातावरण भक्ति और उमंग से सराबोर दिखाई दिया।
सुरक्षित और व्यवस्थित व्यवस्था-
नगर पालिका परिषद नीमच ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विसर्जन के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित व्यवस्था की। दो प्रमुख विसर्जन स्थल- संजीवनी तालाब एवं शिवघाट। विशाल विसर्जन कुंड- संजीवनी पर 30 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा और 12 फीट गहरा। पाँच संग्रहण केंद्र- पिपली चौक, भारतमाता चौराहा, बंसल चौराहा, पाटीदार छात्रावास ग्वालटोली और स्टेशन रोड गणेश मंदिर।
इन केंद्रों से मूर्तियों को सम्मानपूर्वक एकत्र कर विसर्जन स्थल तक पहुँचाया गया। प्रशासन और नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी पूरी तरह मुस्तैद रहे। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे मूर्तियों को स्वयं जल में न विसर्जित करें, बल्कि स्थल पर मौजूद कर्मचारियों को सुपुर्द करें ताकि सुरक्षा और पर्यावरण दोनों सुनिश्चित हो सके।
भक्ति और भावनाओं का संगम-
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की आँखों में बप्पा से बिछड़ने की भावुकता झलक रही थी। महिलाओं ने आरती की थाल सजाई, मंगल गीत गाए और घर के द्वार पर रंगोलियां बनाई। वहीं, युवाओं ने ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों के साथ शोभायात्राएं निकालीं। पूरा नगर गणपति बप्पा की भक्ति में डूबा नजर आया।