सरवानिया महाराज। अंचल में इन दिनों सरसों की फसल की चमक देखते ही बन रही है। सरवानिया महाराज सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पीली चादर ओढ़े सरसों की फसल राहगीरों का स्वतः ही ध्यान आकर्षित कर रही है। इस वर्ष क्षेत्र में सरसों का रकबा भले ही कम रहा हो, लेकिन मौसम के अनुकूल रहने और किसानों की मेहनत के चलते फसल अच्छी स्थिति में है और अब पकने की ओर बढ़ रही है। लहलहाती फसल को देखकर अन्नदाताओं के चेहरे खिले हुए हैं।
वर्तमान में सरसों के पौधों पर पीले फूलों की भरपूर बहार है और पौधों पर फलियों की संख्या भी अच्छी बताई जा रही है। घने बादलों से आच्छादित आसमान के बीच लहलहाती यह फसल संकेत दे रही है कि इस बार क्षेत्र में उत्पादन संतोषजनक रहने की संभावना है।
जल्द शुरू होगी कटाई-
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में सरसों की कटाई शुरू हो जाएगी। किसानों के अनुसार लगभग 70 से 80 प्रतिशत फलियां अब सुनहरी हो चुकी हैं और फसल तेजी से पक रही है। कटाई के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों और थ्रेशर मशीनों की मांग भी बढ़ने लगेगी।
बंपर पैदावार की उम्मीद-
किसानों का कहना है कि सरवानिया महाराज क्षेत्र की मिट्टी और इस वर्ष का अनुकूल तापमान सरसों की गुणवत्ता के लिए बेहतर साबित हुआ है। यदि थ्रेशिंग तक मौसम शुष्क और साफ रहा, तो दानों में तेल की मात्रा और वजन अच्छा रहेगा, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मौसम शुष्क है, हालांकि कहीं-कहीं बूंदाबांदी की सूचना है और ठंड अपने चरम पर है।
किसानों की चिंता भी बरकरार-
कांग्रेस पार्षद विक्रम धनगर ने कहा कि किसानों को हर वर्ष किसी न किसी प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ता है। कभी अतिवृष्टि, कभी असमय बारिश तो कभी पाले से फसलों को भारी नुकसान होता है। सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती हैं, लेकिन धरातल पर किसान अब भी परेशान हैं। मुआवजा और राहत राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है, जबकि लागत लगातार बढ़ रही है और आमदनी अपेक्षा से कम हो रही है।