नीमच। वर्तमान आधुनिक जीवनशैली और बढ़ता भौतिकवाद मानो धरती के दूसरे भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों को कहीं न कहीं अपने मूल कर्तव्यों से भटका रहा है। यह चिंता तब और गहरी हो जाती है, जब सरकार द्वारा गरीबों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में भी अनियमितताएं सामने आने लगती हैं।
केंद्र सरकार ने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से देशभर में गरीब और असहाय वर्ग को निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई है। कई स्थानों पर इस योजना का सही लाभ मिल रहा है, लेकिन कुछ जगहों पर इसके दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के मामले भी उजागर हुए हैं। सरकार बुजुर्गों, गरीब बच्चों, महिलाओं और बेटियों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं लागू कर रही है, जिनका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को राहत पहुंचाना है।
लेकिन दुर्भाग्यवश, कहीं-कहीं धन की चकाचौंध, बड़े नर्सिंग होम बनाने की होड़, लग्जरी वाहनों और दवा कंपनियों के प्रलोभनों ने चिकित्सा सेवा की भावना को प्रभावित किया है। कई मामलों में जीवन रक्षक दवाइयां केवल संबंधित चिकित्सक के क्लीनिक में संचालित मेडिकल स्टोर पर ही उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि शहर और देशभर में अनेक मेडिकल स्टोर एमआरपी से कम दरों पर वही दवाइयां उपलब्ध कराते हैं।
हाल ही में नीमच में मीडिया द्वारा यह मामला उजागर किया गया कि आयुष्मान कार्डधारी मरीजों के परिजनों को इलाज के बावजूद हजारों रुपये की दवाइयां बाहर से मंगाने के लिए मजबूर किया गया। यह न केवल योजना की भावना के विपरीत है, बल्कि सरकार के जनसेवा प्रयासों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। डर और असहायता के कारण लगभग 90 प्रतिशत लोग सामने आकर शिकायत तक नहीं कर पाते और अपनी जीवनभर की जमा पूंजी इलाज में खर्च कर देते हैं।
ऐसे में आवश्यकता है कि जिला प्रशासन आयुष्मान योजना से जुड़े सभी अस्पतालों में शिकायत अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करे, ताकि जरूरतमंद मरीज अपनी समस्या दर्ज करा सकें और त्वरित समाधान मिल सके।
साथ ही चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी सेवा प्रदाताओं से भी यह अपेक्षा है कि यदि उनके संस्थान में इस प्रकार की कोई अनियमितता हो रही हो, तो वे स्वयं संज्ञान लेकर उसे रोकें और चिकित्सा सेवा को सेवा ही बनाए रखें। ईश्वर की कृपा से नीमच के चिकित्सकों पर समाज का विशेष विश्वास है, जिसे बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।