मध्य प्रदेश में डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों में उस समय हड़कंप मच गया, जब सोशल मीडिया पर एक कथित आदेश वायरल हुआ। इस आदेश में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए फिर से पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य करने की बात कही गई है। हालांकि प्रारंभिक जांच में आदेश के फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है।
क्या है वायरल आदेश में दावा
वायरल आदेश में 2 मार्च को जारी आदेश का हवाला देते हुए प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षाकर्मी वर्ग-1 से अध्यापक बने शिक्षकों के लिए भी पात्रता परीक्षा आयोजित करने की बात कही गई है।
इसमें दावा किया गया है कि 1998 के बाद नियुक्त वर्ग-1, 2 और 3 के शिक्षाकर्मियों सहित 2001, 2003, 2005, 2008, 2011 और 2013-14 तक नियुक्त संविदा शिक्षकों को इस परीक्षा में शामिल होना होगा।
आदेश में यह भी उल्लेख है कि परीक्षा के लिए आवेदन 1 अप्रैल से MP Online के माध्यम से भरे जाएंगे और स्कूलों को 25 मार्च तक शिक्षकों की जानकारी का सत्यापन करना होगा।
आदेश पर उठे सवाल
वायरल दस्तावेज की विश्वसनीयता पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस आदेश के पहले पेज पर किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि दूसरे पेज पर अपर संचालक के हस्ताक्षर बताए गए हैं। साथ ही दो पेज के इस पत्र में दो बार प्रतिलिपि दर्शाई गई है, जिससे इसकी प्रमाणिकता संदिग्ध लग रही है।
अधिकारियों से नहीं हो पाया संपर्क
मामले की पुष्टि के लिए लोक शिक्षण आयुक्त शिल्पा गुप्ता और संचालक स्कूल शिक्षा केके द्विवेदी सहित अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल और मप्र अध्यापक-शिक्षक संघ अध्यक्ष भरत पटेल ने कहा कि इस तरह के फर्जी आदेश से शिक्षकों में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए और स्पष्ट किया जाए कि ऐसी कोई परीक्षा प्रस्तावित है या नहीं।