बड़वानी। 17 व 18 मार्च को गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर साखी रिसॉर्ट में स्वामी अमूर्तनंदगिरी सेवा न्यास द्वारा आयोजित दो दिवसीय डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला का सफल आयोजन हुआ। कार्यक्रम में देश, समाज और संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मनीषी वक्ताओं ने अपने विचार रखे। दोनों ही दिनों बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं मातृशक्ति की उपस्थिति रही।प्रथम दिवस मुख्य वक्ता प्रवीण गुप्त (मध्य क्षेत्र संपर्क प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने “भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि स्वबोध यानी अपने इतिहास, संस्कृति और मूल्यों की पहचान ही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है।उन्होंने कहा कि 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता मिली, लेकिन सामाजिक स्वतंत्रता अभी भी अधूरी है। स्व आधारित सोच अपनाकर ही भारत आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बन सकता है। उन्होंने मातृभाषा, स्थानीय बोली और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राहुल पाटीदार ने की। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जन्मभूमि और संस्कृति के प्रति गर्व ही सच्चा स्वबोध है।
द्वितीय दिवस मुख्य वक्ता डॉ. मालासिंह ठाकुर (उपाध्यक्ष, विहिप मालवा प्रांत) ने “कल्चरल मार्क्सवाद” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि आज भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और सनातन मूल्यों पर वैचारिक आक्रमण हो रहा है।
उन्होंने बताया कि यह एक ऐसी विचारधारा है जो परंपराओं, धर्म और राष्ट्रभावना को कमजोर करने का प्रयास करती है। इससे बचने के लिए समाज को जागरूक होकर अपनी जड़ों और संस्कारों को मजबूत करना होगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्राचार्य हीरालाल देवड़ा ने की। उन्होंने कहा कि सनातन विचार “सर्वे भवन्तु सुखिनः” ही विश्व शांति का मार्ग दिखाता है।दोनों दिनों वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देशभक्ति केवल पर्व-त्योहार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन के व्यवहार में उतारना आवश्यक है।कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन से हुआ तथा समापन वंदे मातरम् के साथ हुआ। इस अवसर पर अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।