शाजापुर/उज्जैन। संघर्ष और समर्पण जब अटूट संकल्प से मिलते हैं, तो सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित होते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है शाजापुर की होनहार छात्रा मीना जाटव ने। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय (विक्रम विश्वविद्यालय), उज्जैन द्वारा आयोजित वर्ष 2026 के दीक्षांत समारोह में मीना जाटव को एम.ए. हिंदी साहित्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक (Gold Medal) और उपाधि से सम्मानित किया गया।
उज्जैन के कालिदास अकादमी संकुल में आयोजित इस समारोह में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल और माननीय मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति और शिक्षा जगत की दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी में मीना जाटव को मंच पर आमंत्रित किया गया। राज्यपाल ने उन्हें स्वर्ण पदक पहनाया और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने उनकी इस शैक्षणिक उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बताया।
मीना जाटव, जो शाजापुर निवासी जसवंत जाटव की धर्मपत्नी हैं, बालकृष्ण शर्मा नवीन (बी.के.एस.एन.) स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शाजापुर की नियमित छात्रा रही हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत के बल पर हिंदी साहित्य की जटिलताओं को न केवल समझा, बल्कि एम.ए. की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची (Merit List) में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से कॉलेज प्रबंधन और सहपाठियों में हर्ष की लहर है।
एक विवाहित महिला के रूप में घरेलू जिम्मेदारियों को निभाते हुए उच्च शिक्षा में स्वर्ण पदक प्राप्त करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। मीना जाटव ने सफलता का श्रेय अपने पति जसवंत जाटव और परिवार के निरंतर सहयोग को दिया। उन्होंने कहा, “साहित्य केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि जीवन की संवेदनाओं का दर्पण है। मुझे खुशी है कि मैं अपनी संस्कृति और भाषा के प्रति अपने प्रेम को इस सम्मान के जरिए व्यक्त कर सकी।”
शाजापुर जैसे छोटे शहर से निकलकर संभाग के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडलिस्ट बनना पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। जैसे ही यह खबर शाजापुर पहुँची, जाटव परिवार को बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे जिले की बेटियों के लिए प्रेरणा बताया।
दीक्षांत समारोह के बाद मीना अब शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर शोध (Ph.D.) करने और समाज में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान देने की योजना बना रही हैं। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए मशाल है, जो विवाह या अन्य सामाजिक बंधनों के बाद पढ़ाई छोड़ देती हैं।