रतलाम। इन दिनों चैत्र नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से हुई है, जिसमें माता के अनेक रूपों की आराधना और दर्शन के लिए लोग मंदिर पहुंचते हैं. 51 शक्तिपीठों में से एक पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज माता के मंदिर की प्रसिद्धि के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा, लेकिन हमारे देश में भी हिंगलाज माता का एक शक्तिपीठ स्थित है, जो रतलाम जिले के गुणावद गांव में स्थित है. यहां मलेनी नदी के किनारे पर भगवान शिव और हिंगलाज माता के प्राचीन मंदिर स्थित हैं. वहीं, हिंगलाज माता के इस मंदिर में एक नहीं 2 मूर्ति की स्थापना की गई है. नवरात्रि के मौके पर बड़ी संख्या में भक्त यहां माता हिंगलाज के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. मंदिर के पुजारी दशरथ गोस्वामी ने बताया कि ष्इस मंदिर में हिंगलाज माता और उन्हीं के स्वरूप महिषासुर मर्दनी की मूर्तियों की पूजा की जाती है।
बताया यह भी जाता है की हिंगलाज माता सिंधी समाज, बंजारा और नाथ संप्रदाय की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं. माता के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित हिंगोल नदी के किनारे पर स्थित है. वहीं, भारत में भी कुछ स्थानों पर हिंगलाज माता के प्राचीन मंदिर हैं. लेकिन रतलाम के गुणावद में स्थित हिंगलाज माता का मंदिर प्रसिद्ध हिंगलाज माता मंदिर से मेल खाता है. बलूचिस्तान में माता का मंदिर हिंगोल नदी के किनारे पर स्थित है. यहां हिंगलाज माता का मंदिर मलेनी नदी के तट पर स्थित है. रतलाम के गुणावद गांव का मंदिर भी उपशक्तिपीठ कहलाता है. वहीं पाकिस्तान में स्थित मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।
मां हिंगलाज माता का उपशक्ति पीठ मलेनी नदी के किनारे पर स्थित है. इस नदी का भी पौराणिक महत्व नर्मदा और शिप्रा की तरह है. मलेनी नदी को मल हरणी यानी अशुद्धता को हर लेने वाली पवित्र नदी के रूप में जाना जाता है. यहां लोग अस्थि विसर्जन के लिए भी पहुंचते हैं।
हिंगलाज माता का यह दुर्लभ मंदिर रतलाम जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर गुणावद गांव में स्थित है. यहां सड़क मार्ग से गुणावद गांव पहुंचा जा सकता है. जिसके बाद मलेनी नदी के किनारे पर 1 किलोमीटर के कच्चे रास्ते से होकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है. हिंगलाज माता के दर्शन के साथ ही भगवान शिव के अति प्राचीन मंदिर में भी दर्शन लाभ प्राप्त किया जा सकता है. मंदिर के आसपास खुदाई में मिली 9वीं शताब्दी से लेकर 13वीं शताब्दी तक की प्राचीन गणेश भगवान और देवी देवताओं की अनेक मूर्तियां भी यहां रखी गई हैं. इस शिवशक्ति पीठ पर नवरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. वहीं, सावन के महीने में भी यहां श्रद्धालुओं का तांता लगता है।