खरगोन। निमाड़ अंचल में इन दिनों पारंपरिक गणगौर पर्व की रंगत देखने को मिल रही है। क्षेत्र के सबसे बड़े और प्रमुख त्योहारों में शामिल इस पर्व पर महिलाओं और युवतियों में खासा उत्साह है। पाती खेलने की सदियों पुरानी परंपरा को आज भी पूरे उल्लास के साथ निभाया जा रहा है।
अव गणगौर पर्व के अवसर पर महिलाएं और युवतियां शिव-पार्वती के रूप में सजकर दूल्हा-दुल्हन बनती हैं और ढोल-ताशों की थाप पर पारंपरिक नृत्य करते हुए पाती खेलती हैं। यह परंपरा निमाड़ की सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है, जिसमें हर उम्र की महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
मान्यता है कि गणगौर के दौरान माता पार्वती अपने मायके आती हैं, ऐसे में उन्हें अपने ससुराल और भगवान शिव की याद न सताए, इसके लिए उनकी खुशी के लिए पाती खेलने की परंपरा निभाई जाती है।
इसी कड़ी में टैगोर पार्क से महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पाती खेलते हुए भगवान शिव और माता पार्वती से सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन के रूप में सजी युवतियों ने ‘धनियर राजा’ और ‘रनुबाई’ की बारात निकाली, जो आम के वृक्ष के नीचे से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई वापस अपने गंतव्य तक पहुंची। पूरे आयोजन में लोक संस्कृति, आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।