रतलाम। शासन के निर्देशानुसार 19 मार्च से 30 जून तक चलने वाले जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ जिले के सभी नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों में किया गया। जिला स्तर पर रतलाम शहर में अभियान की शुरुआत नगर निगम कार्यालय के समीप स्थित दो मुंह की बावड़ी की सफाई से की गई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने स्वयं श्रमदान कर बावड़ी की सफाई की।
कार्यक्रम में महापौर प्रहलाद पटेल, जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, नगर निगम अध्यक्ष मनीषा शर्मा, कलेक्टर मिशा सिंह, सीईओ जिला पंचायत वैशाली जैन, नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना, एसडीएम आर्ची हरित सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर प्रहलाद पटेल ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए उनकी साफ-सफाई, गहरीकरण तथा संरक्षण के कार्य किए जाएंगे। साथ ही आमजन को जल स्रोतों के रखरखाव के लिए जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जन सहभागिता से ही जल संवर्धन अभियान सफल होगा। सभी नागरिक संकल्प लें कि पानी की बर्बादी रोकेंगे तथा जल संरक्षण के कार्यों में अपना योगदान देंगे।
कलेक्टर मिशा सिंह ने अभियान की रूपरेखा बताते हुए कहा कि पूरे जिले में नवीन जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण, भूजल संवर्धन, पुराने जल स्रोतों की सफाई व मरम्मत, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल स्रोतों में प्रदूषण कम करना, प्याऊ की व्यवस्था, जल वितरण प्रणालियों की सफाई तथा राजस्व रिकॉर्ड में जल संरचनाओं का अंकन जैसे कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे। साथ ही मानसून में होने वाले पौधारोपण के लिए भी आवश्यक तैयारियां की जाएंगी।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के तहत 30,760 पौधों का रोपण, 647 खेत तालाब, 16 अमृत सरोवर, 814 कुओं का रिचार्ज तथा एनआरएम के 292 अपूर्ण कार्य पूर्ण किए जाएंगे। वाटरशेड योजना के अंतर्गत 20 कंटूर ट्रेंच, 4 तालाब, 1 चेकडैम, 6 स्टॉप डैम और 7 फार्म पॉण्ड सहित कुल 38 कार्य पूरे किए जाएंगे। इसके अलावा 1255 प्राथमिक शालाओं एवं सभी आंगनवाड़ियों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं बनाई जाएंगी।
नगरीय विकास विभाग द्वारा 18 बगीचों का हरित विकास, 51 सार्वजनिक प्याऊ की व्यवस्था, 20 जल संरचनाओं का संवर्धन, 9 नए हरित क्षेत्र विकसित करना तथा 52 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग निर्माण किए जाएंगे। वन विभाग द्वारा 276 हेक्टेयर क्षेत्र में 2,03,500 पौधों का रोपण तथा 7.61 हेक्टेयर क्षेत्र में जलग्रहण उपचार कार्य किया जाएगा।
जन अभियान परिषद द्वारा नदी तटों की सफाई, कुएं-बावड़ी व तालाबों का गहरीकरण, ग्राम पंचायतों में प्रभात फेरियां, रैलियां, जल संगोष्ठियां, दीवार लेखन एवं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्रशासन ने बताया कि अभियान को इस प्रकार संचालित किया जाएगा कि यह समाज और सरकार की साझेदारी से जल संरक्षण का जन आंदोलन बन सके।