आज विशेष खगोलीय घटना वसंत संपात घट रही है। सूर्य ठीक विषुवत रेखा पर लंबवत हैं। इस कारण पूरी पृथ्वी पर दिन और रात बराबर (यानी 12-12 घंटे) के होंगे। उज्जैन स्थित शासकीय जीवाजी वेधशाला में इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देखने के लिए सुबह से ही खगोलप्रेमियों और छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी।
वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के परिक्रमण के कारण सूर्य कर्क रेखा से मकर रेखा के बीच गतिशील प्रतीत होता है। 21 मार्च को सूर्य के विषुवत रेखा पर लंबवत होने के कारण यह विशेष स्थिति बनती है, जिसे वसंत संपात कहा जाता है।
सूर्य की क्रांति लगभग शून्य होती है
उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्य की क्रांति लगभग शून्य (0°) होती है और सूर्य उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ना शुरू करता है। इसके बाद दिन धीरे-धीरे बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। यह क्रम 21 जून तक जारी रहता है, जब उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है।
इस खगोलीय घटना को वेधशाला में पारंपरिक यंत्रों (शंकु यंत्र और नाड़ी वलय यंत्र) के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से देखा गया। खास बात यह है कि शंकु की छाया पूरे दिन एक सीधी रेखा (विषुवत रेखा) पर चलती हुई दिखाई देगी, जो इस घटना का प्रमुख वैज्ञानिक संकेत है।
उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करेंगे सूर्य
22 मार्च से सूर्य के उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश के साथ ही उसकी किरणों की तीव्रता बढ़ने लगेगी, जिससे ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ेगा। इस खगोलीय घटना ने न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से लोगों को जागरूक किया, बल्कि छात्रों और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला का अनुभव भी प्रदान किया।