भोपाल। एम्स भोपाल अब दो खतरनाक जहरों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी में है, जो आम लोगों की जान ले रहे हैं। फॉस्फीन गैस छोड़ने वाले एल्युमिनियम फॉस्फाइड (कीटनाशक) और जिंक फॉस्फाइड (चूहा मार दवा) पर आयोजित विशेष विष विज्ञान सत्र में विशेषज्ञों ने इनके खतरों, लक्षणों और इलाज की जानकारी दी।
न्याय चिकित्सा एवं विष विज्ञान विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. एस श्रीहरि ने बताया कि ये जहर आसानी से उपलब्ध हैं और लापरवाही या गलत उपयोग के कारण गंभीर मामलों में बदल रहे हैं। समय पर पहचान और उपचार से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
वहीं, एम्स भोपाल के पॉइजन इंफॉर्मेशन सेंटर (पीआईसी) के आंकड़े बताते हैं कि देश में जहर की चपेट में आने वाला हर दूसरा विक्टिम 10 साल से छोटा बच्चा है। इस सेंटर में साल 2020 से अब तक 786 फोन कॉल देशभर से आए हैं, जिनमें से 401 कॉल में विक्टिम की आयु 10 साल से कम थी।
विशेषज्ञों ने बताया कि फॉस्फाइड जैसे जहर शरीर में पहुंचकर तेजी से असर करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। समय रहते पहचान और तुरंत चिकित्सा सुविधा मिलने पर मरीज की जान बचाना संभव है।