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March 23, 2026, 6:01 pm
BIG NEWS : ओबीसी आरक्षण मामले में सुनवाई, हाईकोर्ट ने कहा- 2 अप्रैल को सभी पक्ष पेश करें अपने केस की जानकारी, 16 अप्रैल को फाइनल सुनवाई, पढे़ खबर 

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जबलपुर। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के विवाद पर सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि 2 अप्रैल को सभी पक्ष अपने केस की जानकारी पेश करें। सभी पक्षों की जानकारी आने के बाद फाइनल सुनवाई होगी। 16 अप्रैल को फाइनल सुनवाई तय की गई है।


अब एक बार फिर सुनवाई का केंद्र मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के 21 फरवरी 2026 के आदेश के बाद आरक्षण से जुड़ी सभी लंबित याचिकाएं वापस हाईकोर्ट को भेज दी गई हैं, जिन पर सुनवाई हुई है।


करीब 17 माह बाद हाईकोर्ट में इस महत्वपूर्ण मामले पर दोबारा बहस शुरू हुई है। इससे पहले सितंबर 2024 में ओबीसी आरक्षण से संबंधित कुल 10 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दी गई थीं।


दरअसल, कमलनाथ सरकार के दौरान ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के लिए अध्यादेश लाया गया था, जिसे बाद में कानून का रूप दे दिया गया। इस बदलाव के बाद राज्य में कुल आरक्षण 64 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

 

इस फैसले को अनारक्षित वर्ग की छात्रा आशिता दुबे सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें तर्क दिया गया कि यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन है। बता दें कि मध्य प्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण पर न्यायिक विवाद लंबित है। कई भर्तियों में 14 प्रतिशत लागू किया था। वहीं छत्तीसगढ़ में अधिक आदिवासी आबादी को आधार बनाया। मामला कोर्ट में लंबित है।


सुप्रीम कोर्ट का क्या निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) गठित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी कहा गया कि तीन माह के भीतर सभी याचिकाओं का अंतिम निपटारा किया जाए। आरक्षण नीति की वैधता का परीक्षण राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर किया जाए।


अब आगे क्या
फाइनल सुनवाई में तय होगा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण संवैधानिक रूप से वैध है या नहीं। इस फैसले का सीधा असर राज्य में भर्ती, शिक्षा और आरक्षण व्यवस्था पर पड़ेगा। माना जा रहा है कि यह मामला न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि देशभर में आरक्षण नीति को लेकर एक अहम नजीर साबित हो सकता है।

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