चित्तौड़गढ़। वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनज़र राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव द्वारा सभी जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की गई, जिसमें गैस एवं पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की गई। बैठक के बाद जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने जिले में एलपीजी गैस के सुचारू वितरण, स्टॉक सत्यापन एवं आपूर्ति व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। जिले में एलपीजी गैस की बुकिंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए नई अवधि तय की गई है, जिसमें सामान्य घरेलू कनेक्शन के लिए 25 दिन तथा उज्ज्वला कनेक्शन के लिए 45 दिन की अवधि निर्धारित की गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य में गैस वितरण का अधिकांश कार्य डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है। जहां राज्य स्तर पर 90 प्रतिशत वितरण ओटीपी अथवा डीएसी प्रणाली से हो रहा है, वहीं चित्तौड़गढ़ जिले में यह आंकड़ा 98 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वर्तमान में गैस डिलीवरी का बैकलॉग केवल 3 से 4 दिनों का है।
बैठक में एलपीजी के विकल्प के रूप में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शहरी क्षेत्रों में गैस पाइपलाइन का विस्तार कर अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ दिया जाए। पीएनजी गैस एलपीजी की तुलना में किफायती और निरंतर उपलब्ध रहने वाली सुविधा है।
जिला कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिले में गैस एवं पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। वर्तमान में घरेलू गैस सिलेंडरों का स्टॉक 12,277 तथा व्यावसायिक सिलेंडरों का स्टॉक 768 है, जबकि प्रतिदिन लगभग 8 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है।
कलेक्टर ने अधिकारियों को गैस एजेंसियों एवं पेट्रोल पंपों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। कालाबाजारी, जमाखोरी या दुरुपयोग पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उन्होंने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता पड़ने पर हेल्पलाइन या कंट्रोल रूम से संपर्क करें। साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता को लेकर भी आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।