देवास। जिला जेल देवास में शनिवार को “मेगा विधिक जागरूकता एवं आउटरीच शिविर” का सफल आयोजन हुआ, जहां कानून की जानकारी के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई उम्मीद जगाई।
कार्यक्रम में मुख्य जिला न्यायाधीश अजय प्रकाश मिश्र, जेल अधीक्षक विद्या प्रसाद भूषण, उप जेल अधीक्षक अनिल दूबे, अन्य न्यायाधीशगण, जेल स्टाफ एवं डॉक्टरों की टीम उपस्थित रही। सभी ने बंदियों को विधिक जानकारी देने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का सबसे मार्मिक पल “बंदी-शिशु मिलाप” रहा, जहां लंबे समय बाद बंदियों की अपने बच्चों और परिजनों से मुलाकात कराई गई। इस दौरान कई बंदियों की आंखें नम हो गईं, वहीं मासूम बच्चों के चेहरे पर अपनों से मिलने की खुशी झलक उठी। यह दृश्य न केवल भावुक करने वाला था, बल्कि रिश्तों की अहमियत और परिवार के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी कराता रहा।
शिविर के दौरान कैदियों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। ब्लड प्रेशर, शुगर, तापमान और ऑक्सीजन स्तर की जांच के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जरूरी परामर्श दिया और दवाइयों का वितरण किया। साथ ही स्वच्छता और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।
मुख्य जिला न्यायाधीश अजय प्रकाश मिश्र ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल कानूनी जानकारी देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बंदियों के भीतर सुधारात्मक और सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम भी हैं। उन्होंने कहा कि जब बंदी अपने परिवार से जुड़ाव महसूस करते हैं, तो उनके भीतर जीवन को नई दिशा देने और अपराध से दूर रहने की भावना मजबूत होती है।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि सही मार्गदर्शन, संवेदनशील पहल और परिवार का साथ मिल जाए, तो हर व्यक्ति के जीवन में बदलाव संभव है। जिला जेल देवास का यह प्रयास बंदियों के पुनर्वास और उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम साबित हुआ।