चित्तौड़गढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के निंबाहेड़ा सेवा केंद्र पर नवरात्रि एवं रामनवमी के पावन अवसर पर विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सेवा केंद्र के भाई-बहनों द्वारा चैतन्य देवियों एवं श्रीराम का आकर्षक श्रृंगार कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में बीके शिवली दीदी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वास्तविक रूप से भक्ति मार्ग में जिन देवियों की पूजा की जाती है, वे सभी शिव शक्तियां हैं। उन्होंने पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि जब संसार में असुरों का प्रभाव बढ़ा, तब ब्रह्मा और विष्णु ने परमात्मा शिव से सहायता मांगी। इसके बाद शिव से प्रकट हुई शक्तियों- अंबा, दुर्गा और जगदंबा ने धरती पर असुरों का संहार किया।
उन्होंने इस कथा के आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि आज मनुष्य के भीतर ही विकारों और अवगुणों रूपी ‘असुर’ छिपे हुए हैं, जिनका नाश कोई बाहरी व्यक्ति नहीं कर सकता। इसके लिए व्यक्ति को स्वयं अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानते हुए शिव शक्ति स्वरूप बनना होगा।
बीके शिवली दीदी ने आगे कहा कि परमात्मा शिव की याद और राजयोग साधना के माध्यम से हम ज्वाला स्वरूप बनकर अपने भीतर की बुराइयों का अंत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्रि का वास्तविक संदेश यही है कि जब मनुष्य अपने अंदर के अवगुणों का नाश करता है, तब कलयुग रूपी अंधकार समाप्त होकर सतयुग रूपी उजाला आरंभ होता है।
इस अवसर पर सेवा केंद्र में चैतन्य नवदुर्गा दर्शन की भव्य झांकी सजाई गई, जिसमें राजयोग का नियमित अभ्यास करने वाली एवं ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाली तपस्वी माताओं-बहनों को नवदुर्गा के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने देवियों की आरती की और गरबा-रास में भाग लिया। अंत में परमात्मा शिव की स्मृति में सभी को प्रसाद वितरित किया गया।