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March 28, 2026, 7:50 pm
KHABAR : मिटती विरासत को मिला जीवन, जल गंगा अभियान से निखरी भैसोदामंडी की प्राचीन बावड़ी, कायाकल्प से फिर लौटी पुरानी पहचान, क्षेत्र में खुशी, पढ़े रवि पोरवाल की खबर 

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मंदसौर। जिले के भैसोदामंडी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन बावड़ी, जो कभी स्थानीय लोगों के लिए प्रमुख जल स्रोत थी, अब फिर से अपनी पुरानी पहचान में लौट आई है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए गए जीर्णाेद्धार कार्यों ने इस उपेक्षित धरोहर को नई जिंदगी दे दी है।

वर्षों से उपेक्षा के कारण यह ऐतिहासिक बावड़ी घास-फूस, झाड़ियों और गंदगी से ढक चुकी थी। इसका पानी दूषित हो गया था और उपयोग लगभग समाप्त हो गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बावड़ी ग्वालियर रियासत काल की महत्वपूर्ण जल संरचना रही है, जो कभी क्षेत्र की प्यास बुझाने के साथ-साथ सामाजिक जीवन का केंद्र भी हुआ करती थी।

जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत के साथ ही इस बावड़ी के कायाकल्प को प्राथमिकता दी गई। अभियान के तहत साफ-सफाई, कचरा निष्कासन, जल स्रोत का पुनर्जीवन और आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बावड़ी अब स्वच्छ, सुरक्षित और आकर्षक रूप में दिखाई दे रही है।

आज यह बावड़ी न केवल जल संरक्षण का सशक्त माध्यम बन गई है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी बनकर उभरी है। इस पहल से स्थानीय नागरिकों में जागरूकता बढ़ी है और वे इसके संरक्षण के लिए आगे आ रहे हैं।

भैसोदामंडी की यह पहल दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास और सही दिशा में कार्य कर पुरानी धरोहरों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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