नीमच। गायत्री परिवार द्वारा जिला जेल नीमच में नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बंदियों को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार के वरिष्ठ सदस्य अशोक सिंहल ने परम पूज्य गुरुदेव का दिव्य संदेश देते हुए मानव जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि “पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया” अर्थात स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सुख है। उन्होंने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि निरोगी जीवन के लिए व्यक्ति को सभी प्रकार के व्यसनों से पूर्णतः दूर रहना आवश्यक है।
कार्यक्रम में कमल एरन ने संत तुलसीदास द्वारा रचित दोहे “बड़े भाग्य मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा” की व्याख्या करते हुए कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और अनमोल है। इसे श्रेष्ठ बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने चिंतन, चरित्र और व्यवहार को उत्कृष्ट बनाना चाहिए। उन्होंने आत्मचिंतन, आत्मसुधार, आत्मनिर्माण एवं आत्मविकास के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला और सभी बंदियों से बेहतर जीवन की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत युवा अशोक धाकड़ एवं दीपक अहीर द्वारा प्रेरणास्पद युग संगीत प्रस्तुत कर की गई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक और उत्साहपूर्ण बन गया।
कार्यक्रम की संयोजक मंजुला शर्मा ने जिला जेल अधीक्षक, सभी सहयोगियों, बंदियों एवं गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर गायत्री परिवार द्वारा ‘अखंड ज्योति’ पत्रिका, मंत्र लेखन सामग्री एवं सद्वाक्य के पोस्टर भेंट किए गए।
कार्यक्रम के अंत में जिला जेल नीमच के अधीक्षक ने गायत्री परिवार के इस सराहनीय प्रयास के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।