नीमच। पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता से किए गए त्याग के आव्हान पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसी भी परिवर्तन की शुरुआत सबसे पहले सत्ता और नेतृत्व से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्धकाल हो, नोटबंदी, कोरोना काल या विकास योजनाएं- हर दौर में जनता से त्याग और सहयोग की अपील की गई, लेकिन धरातल पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दिए।
डॉ. जाजू ने कहा कि यदि पेट्रोल की बचत, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और सादगी अपनाने की बात की जा रही है, तो इसकी शुरुआत भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े नेता स्वयं मेट्रो, लोक परिवहन और सीमित संसाधनों का उपयोग करें, तभी आम जनता भी प्रेरित होगी।
उन्होंने गैस सब्सिडी छोड़ने की पूर्व अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने स्वयं सब्सिडी नहीं छोड़ी थी। डॉ. जाजू ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि शास्त्री जी ने पहले स्वयं उपवास शुरू किया था, तभी पूरे देश ने उनका अनुसरण किया।
उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर केंद्र सरकार देश को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताती है, वहीं दूसरी ओर आम जनता से तेल, पेट्रोल और अन्य खर्चों में कटौती की अपील की जा रही है। डॉ. जाजू ने कहा कि कथनी और करनी में समानता होना आवश्यक है, तभी जनता नेतृत्व पर विश्वास करेगी।