नीमच। हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल सामने आई है। सुरेंद्र ठाकुर के निधन के बाद उनके परिवार के सामने अंतिम संस्कार को लेकर आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई थी। ऐसे मुश्किल समय में अब्दुल जब्बार कुरेशी परिवार के लिए सहारा बनकर सामने आए।
अब्दुल जब्बार कुरेशी ने सुरेंद्र ठाकुर के अंतिम संस्कार का पूरा खर्च अपने जिम्मे लिया और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया संपन्न करवाई। उनके इस मानवीय कदम की क्षेत्र में सराहना हो रही है।
यह घटना संदेश देती है कि जरूरत के समय इंसानियत और मदद की भावना धर्म और मजहब की सीमाओं से ऊपर होती है। अब्दुल जब्बार कुरेशी का यह कदम न सिर्फ शोकाकुल परिवार के लिए सहारा बना, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करने वाला रहा।
सुरेंद्र ठाकुर की अंतिम यात्रा में भूरा कुरेशी, शोएब कुरेशी, आबिद कुरेशी, सद्दाम पठान, मलिक कुरेशी, इम्तियाज कुरेशी, शाहिद भाई और जाकिर भाई सहित मृतक के परिजन मौजूद रहे।