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December 22, 2022, 3:31 pm
KHABAR : खिमला के किसानो को न्याय दिलाने के लिए मैं अपनी जान तक दे दुंगा- कछावा, ग्रीनको एनर्जी कंपनी ने किसानो को मुआवजा देने की बजाए दलालो के माध्यम से किसानो के साथ की धोखाधडी, पढ़े शब्बीर बोहरा की खबर

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मनासा। रामपुरा क्षेत्र के किसानो के साथ प्रदेश और देश की सरकारे एक प्रायवेट कंपनी ग्रीनको एनर्जी के माध्यम से गांव खिमला के किसानो और आदिवासीयो की जमीन हडपना चाहती है। कंपनी ने सरकार के लोगो के माध्यम से किसानो से कहा कि हम आपकी निजी जमीन का 100 फिसदी और सरकारी जमीन जो आपके कब्जे की है उसका 75 फिसदी मुआवजा देगे। लेकिन कंपनी ने किसानो को मुआवजा देने की बजाए दलालो के माध्यम से नियम के विरूद्व जमीन खरीद ली। किसानो के साथ कंपनी और  सरकार अन्याय कर रही है। किसानो को न्याय दिलाने के लिए मैं किसानो के साथ शुक्रवार से आमरन अनशन पर बैठुगा और आमरन अनशन तब तक रहेगा जब तक किसानो को न्याय नही मिल जाए। किसानो को न्याय दिलाने के लिए मैं अपनी जान तक दे दुंगा।

यह बात जिला पंचायत सदस्य नखरा कछावा के प्रतिनिधी आर सागर कछावा ने डाक बंगले पर पर पत्रकारो से पत्रकार वार्ता मे कही। कछावा ने कहा कि जब ग्रीनको कंपनी गांव खिमला मे प्रोजेक्ट की शुरूआत से पहले गई थी उस वक्त किसानो और ग्रामीणो ने कंपनी का सत्कार किया था। आदीवासीयो और किसानो के मन मे उम्मीद जागी थी कि अब उनके गांव का और उनका विकास होगा और उस वक्त किसानो से कहा था कि आपकी निजी जमीन का कंपनी मुआवजा के बतौर 100 प्रतिशत और कब्जे की जमीन का 75 फिसदी मुआवजा देगी। लेकिन कंपनी उसके बाद मुखर गई। कंपनी को प्रोजेक्ट के लिए कुल 400 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। जिसमे से कंपनी ने वन विभाग की 301.36 हेक्टेयर किसानो की निजी जमीन 71.96 हेक्टेयर और सरकारी कब्जे की जमीन 28.28 हेक्टेयर जमीन लेने की बात कही। लेकिन कंपनी की नियत मे खोट पैदा हुई और बाद मे कंपनी ने अपने संसाधनो को रखने के लिए 64 हेक्टेयर जमीन को कवर्ड करने की कार्रवाई शुरू की। इसको लेकर कंपनी ने प्रशासन के माध्यम से किसानो को जमीन लेने के लिए नोटिस जारी किए है। 

कछावा ने कंपनी पर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी ने किसानो और ग्रामीणो को शुरुआत के समय गांव मे जब कार्यक्रम किया था। उस समय कंपनी ने शिविर लगाकर सत्ता पक्ष के नेताओ की मौजुदगी मे वादा किया था कि वे मुआवजा के साथ ही गांव विकास के लिए 10 करोड की राशी खर्च करेगे। लेकिन साढे तीन साल बाद भी कंपनी ने विकास के नाम पर एक रूपया भी खर्च नही किया। कंपनी ने किसानो को विकास के नाम पर गुमराह करते हुए सिर्फ गांव मे एक पानी का आरो और स्वास्थ्य शिविर लगाया है। मैने जब किसानो के बीच जाकर किसानो और आदीवासीयो के दर्द को नजदीकी से महसूस किया तो उनको न्याय दिलाने के लिए मैने कंपनी के खिलाफ गांव खिमला मे किसानो के साथ धरना शुरू किया। 10 दिनो तक उपवास किया उसके बाद भी नही तो कंपनी ने कोई एक्शन लिया और नही सरकार के किसी जनप्रतिनिधी ने इस सबंध मे कोई बात किसानो से की। किसानो की जमीन के मामले मे जिन रामपुरा के दलालो ने कंपनी के कहने पर झालसाजी के साथ जमीनो की रजिस्ट्रीयां करवाई है उन दलालो के खिलाफ कंपनी और प्रशासन पुलिस मे एफआईआर दर्ज करवाएं। इसके साथ ही कंपनी ने अभी तक जो 60 एकड जमीन की रजिस्ट्री करवाई है उनको शून्य घोषित किया जाए। मैं किसानो के साथ 23 दिसंबर से खिमला मे आमरन अनशन पर बैठुगा और मेरा यह आमरन अनशन जब तक जारी रहेगा जब तक की किसानो को न्याय नही मिल जाए। किसानो को न्याय दिलाने के लिए भले ही मेरी जान क्यो नही चली जाए।  

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