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February 3, 2023, 6:23 pm
REPORT : नीमच शहर की जटिल समस्या बंगला-बगीचा को लेकर वरिष्ठ इंका नेत्री मधु बंसल की तल्ख टिप्पणी, बोली- असंगत समाधान का फर्जी श्रेय लेने वाले मुख्यमंत्री और नीमच विधायक माफी मांगे जनता से, पढ़े खबर 

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नीमच। वरिष्ठ इंका नेत्री और प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की सदस्य मधु बंसल ने नीमच की बंगला - बगीचा समस्या को लेकर भाजपा पर करारा हमला किया है। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि मुख्यमंत्री, नीमच के भाजपा दिलीप सिंह परिहार और तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष राकेश जैन की समस्या के सही एवं सर्वमान्य समाधान की कभी नीयत ही नहीं रही। मौजूदा नपा अध्यक्ष भी नौटंकी कर रही है। विधायक को इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस की चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि वह बहस में भाजपा की दुर्भावना को सिद्ध कर देंगी।

दस साल के छलावे के बाद मुख्यमंत्री ने दिया दूषित व्यवस्थापन नियमों का धोखा- 
बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मई 2007, 31 मई 2008, 17 जुलाई 2008, अप्रैल 2009 , 26 जून 2009 , 17 सितंबर 2009 , 17 फरवरी 2011, वर्ष 2012 , 27 फरवरी 2013 , 24 मई 2013 और 20 अगस्त 2013 को नीमच प्रवास पर आए थे । अगर इन तारीखों पर हम गौर करें तो स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री हमेंशा विधानसभा , लोकसभा और नगर पालिका परिषद नीमच के चुनावों से पूर्व  प्रचार के संदर्भ में नीमच आए थे । 
वोट बटोरने के लिए की गई इन नीमच यात्राओं में मुख्यमंत्री ने बार - बार जनता को यह झूँठे आश्वसन दिये कि  हम नाम मात्र का प्रीमियम , लीज और विकास शुल्क लेकर बंगला - बगीचा क्षेत्र वासियों की समस्या का स्थायी हल कर देंगे । उन्होंने यह झांसा तक दिया कि सरकार के सारे अधिकारियों को नीमच लेकर आऊँगा और यहीं आप के बीच बैठ कर आप से पूछ कर समस्या का सर्वहितकारी समाधान कर दूंगा । नीमच की जनता ने हर बार मुख्यमंत्री की बात पर भरोसा किया और विधानसभा चुनावों के साथ - साथ नपा परिषद में भी  भाजपा को समर्थन दिया ।

बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने नीमच की जनता के विश्वास और समर्थन के बदले सिर्फ धोखा ही धोखा दिया है । मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन के माध्यम से नपा अधिनियम की धारा 100 ( 1 ) ( 2 ) के तहत नगरपालिका नीमच को बंगला - बगीचा - खेत क्षेत्र की समस्त प्रश्नाधीन भूमियों के पुनर्ग्रहण का नोटिस ही थमा दिया था । उनकी दुर्भावना थी कि नपा को एकदम से वंचित कर अपने स्तर पर मनमानी करें । बंसल ने कहा कि काँग्रेस नेतृत्व के निर्देश पर काँग्रेस की तत्कालीन नगरपालिक अध्यक्ष ने हायकोर्ट में याचिका दायर कर 03 मई 2012 को स्थगन लेकर मुख्यमंत्री के मंसूबे असफल किये थे । बाद में पुनर्ग्रहण नोटिस हटाया गया ।
मुख्यमंत्री इस पर भी बाज नही आये और उन्होंने समाधान के लिए व्यवस्थापन नियम बनाने के लिये जो कमेटी बनाई उसमे नीमच के प्रभावित लोगों की राय को महत्व देने की बात तो जाने दीजिये खुद उनकी ही पार्टी के तत्कालीन नीमच नगरपालिका अध्यक्ष राकेश जैन और विधायक दिलीप सिंह परिहार तक को शामिल नही किया । बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का रवैया ऐसा तानाशाहीपूर्ण रहा कि समस्या का समाधान जैसा हम करेंगे वैसा ही आप सभी को स्वीकर करना होगा । 
बंसल ने कहा कि समाधान के नाम पर वोट बटोरने के षड्यंत्र के तहत मुख्यमंत्री ने ब्यूरोक्रेसी के माध्यम से अंततः मार्च 2017 में व्यवस्थापन के लिए जैसे मनमाने , असंगत और अनीतिपूर्ण  नियम बनवाये और 17 मई 2017 को मध्यप्रदेश सरकार के राजपत्र में प्रकाशित करवा कर जनता पर थोपे दिए गए हैं उनसे समाधान के बजाय समस्या और जटिल हो गई है । उनका स्पष्ट मकसद यही रहा है कि समस्या को जिंदा रख कर जनता को झांसे देते हुए समर्थन बटोरने का खेल जारी रहे । 

जन - दायित्व की अवहेलना कर यस मैन बने रहे विधायक और तत्कालीन नपाध्यक्ष- 
बंसल ने कहा कि व्यवस्थापन प्रारूप में निर्धारित नियम पक्षपातपूर्ण और अव्यवहारिक रखे गए हैं । इनमें केवल पांच हजार फीट तक के भवन - भूखंडों के ही व्यवस्थापन के प्रावधान तय किए गए जबकि इससे बड़े आकार के भवन भूमियों की समान स्थिति होने के बावजूद उनके व्यवस्थापन के लिए एकदम अनीति पूर्ण नियम बनाये गये । पाँच हज़ार फीट तक के व्यवस्थापन के तहत भी प्रीमियम , वार्षिक लीज तथा अन्य शुल्क निर्धारण में भी बिल्कुल असंगत , विधि विरुद्ध अतार्किक अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं ।
इसी प्रकार व्यवस्थापन नियमों के तहत हिंदू विधि के अनुसार यादी बंटवारा , मुस्लिम विधि के अनुसार हिबानामा को कोई मान्यता नहीं दी गई और आधिपत्य संबंधी दस्तावेजों को लेकर भी अनेकानेक विसंगतियां जानबूझकर रखी गई । उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के अनेक न्याय निर्णयों में यादी बंटवारे और अपंजीकृत दस्तावेजों पर की गई वसीयतों को मान्यता दी गई
 है । किन्तु व्यवस्थापन प्रक्रिया में ऐसे दस्तावेजों को मान्यता नही दी जा रही है । 
बंसल ने कहा कि ऐसे त्रुटिपूर्ण और प्रभावितों के साथ हर तरह से अन्याय के प्रतीक व्यवस्थापन रूपी समाधान को लेकर प्रारूप के प्रकाशन के साथ ही प्रभावितों के साथ हुए अन्याय को लेकर विधायक दिलीप सिंह परिहार और तत्कालीन नपाध्यक्ष राकेश जैन को अविलम्ब सुधार के लिए पहल कर जन दायित्व का निर्वाह करना था । प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और इस नाते दोनों निर्वाचीत नेताओ का प्रथम दायित्व और जिम्मेदारी थी कि वह प्रभावितों के साथ न्याय करवाते । लेकिन दोनों नेता चुप्पी धारण कर यस मैन बने रहे  और व्यवस्थापन प्रारूप को ऐतिहासिक एवं चमत्कारिक बताते हुए फर्जी श्रेय बटोरने की होड़ में ही लगे रहे थे ।

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