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June 12, 2023, 5:07 pm
KHABAR : महाकाल को अर्पित पगड़ी कबाड़ में रख दी, दान की गई सामग्री कबाड़ में देख भक्त हो रहे आहत, पड़े खबर

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महाकालेश्वर मंदिर में देश-विदेश से आने वाले भक्तों द्वारा भगवान महाकाल के लिए अर्पित होने वाली सामग्रियों को लेकर मंदिर प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को अर्पित पगड़ी मंदिर परिसर में कबाड़ के बीच रख दी। यही नही, यहां दान में मिली अन्य सामग्री भी रखी है। ऐसे में श्रद्धालु बाबा महाकाल को अर्पित सामग्री की यह स्थिति देख व्यथित भी हो रहे हैं। मामले में मंदिर के स्टोर विभाग के प्रभारी ने कहा कि हम जल्दी ही वहां से पगड़ी हटाकर व्यवस्थित स्थान पर रखेंगे।
मंदिर में देश और विदेश से आने वाले भक्त भगवान महाकाल को अर्पित करने के लिए सामग्री लेकर आते हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन की लापरवाही से श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दान की सामग्री कबाड़ का हिस्सा बन जाती है। वर्तमान में श्री जूना महाकाल के पीछे की ओर दर्जनों की संख्या में भगवान महाकाल को अर्पित आकर्षक पगड़ी, दान में दिया गया बड़ा त्रिशूल, डमरू, जलाधारी कबाड़ में रख दिए हैं।
इसी जगह श्रावण मास में बाबा महाकाल की सवारी के साथ निकलने वाले रथ और उस पर विराजित गरुड़, सिंहासन भी कबाड़ का हिस्सा बन गए। सामग्रियों के संबंध में जानकारी लेने पर बताया गया कि पिछले दिनों नेपाल के प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान सभी दान सामग्री जूना महाकाल मंदिर की ओर पीछे रखी गई थी।
इसके बाद किसी ने भी यह सामग्री वापस सुरक्षित स्थान पर नही रखी है। ऐसे में धूप, पानी के कारण दान सामग्री खराब होने को है। मामले में मंदिर के स्टोर प्रभारी अभिषेक उपाध्याय से चर्चा की तो उनका कहना था कि यह सही है दान सामग्री को म्यूजियम से हटाने पर व्यवस्थित रखा जाना था। भगवान की पगड़ी को व अन्य सामग्री को सही जगह रखने के लिए अभी कर्मचारियों को कहता हूं।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में बीते 2 वर्ष पहले तक बाहर से आने वाले श्रद्धालु कई तरह की आकर्षक पगड़ी हजारों रूपए में खरीद कर बाबा महाकाल को अर्पित करते थे। मंदिर प्रशासन के पास पगड़ी की संख्या जब अधिक हुई तो मंदिर परिसर में पगडिय़ों को सुरक्षित रखने के लिए कांच का म्यूजियम भी बनाया गया था।
उस दौरान तय हुआ था कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को दान राशि प्रदान करने पर स्मृति के स्वरूप भगवान को अर्पित पगड़ी भेंट की जाएगी, लेकिन मंदिर प्रशासन इस व्यवस्था पर ज्यादा अमल नही कर पाया। मंदिर में विस्तारीकरण कार्य और वीवीआईपी के आगमन को देखते हुए जूना महाकाल के पास पड़े कबाड़़ का हिस्सा बना दिया।
भगवान महाकाल के भक्तों द्वारा पूर्व वर्ष में पहले स्टील से निर्मित करीब 15 से 20 फीट लंबा डमरू लगा त्रिशूल एक भक्त द्वारा मंदिर समिति को मंदिर परिसर में लगाने के लिए अर्पित किया था। यह त्रिशूल आज की स्थिति में कबाड़ में पड़ा होकर धूप हवा पानी लगने से जंग लगने की कगार पर है। जबकि इसका उपयोग मंदिर परिसर में खाली स्थान पर कहीं भी लगाकर किया जा सकता था। ऐसी कई सामग्री है जिनका उपयोग ही नही किया गया है। ऐसे में यह नजारा देख श्रद्धालुओं की भावनाएं भी आहत हो रही है।
श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में जूना महाकाल के समीप कबाड़ में पड़ी दान सामग्री व भगवान की पगड़ी की स्थिति को लेकर श्री महाकाल भक्त मंडल के अध्यक्ष व नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने कहा कि मंदिर प्रशासन को भक्तों द्वारा दी गई दान राशि को सहज कर रखना चाहिए। यह आस्था का विषय है। भगवान को अर्पित दान सामग्री कबाड़ में रखने से श्रद्धालुओं की भावना आहत होती है। यह कार्य निंदनीय है। मंदिर समिति का ध्यान केवल पैसे लेकर दर्शन कराने की ओर है।

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