नीमच। सिख समाज के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ऐसे वीर संत थे, जिनकी मिसाल दुनिया के इतिहास में कम ही मिलती है। उन्होंने मुगलों के जुल्म के सामने कभी भी घुटने नहीं टेके और खालसा पंथ की स्थापना की। आनंदपुर साहिब में वैशाखी के अवसर पर एक धर्मसभा के दौरान उन्होंने पंच प्यारों को चुना। उनके ही निर्देश पर सिखों के लिए खालसा पंथ के प्रतीक के तौर पर 5 ककार यानी केश, कंघा, कृपाण, कच्छ और कड़ा अनिवार्य हुआ। वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह जैसे वाक्य गुरु गोविंद सिंह की वीरता को बयां करते हैं।
17 जनवरी को गुरु गोविन्द सिंह जी का 357वां पावन प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। इसी उपलक्ष में आज नीमच शहर के प्रमुख मार्गो से सिख समाज का नगर कीर्तन निकला। शहर के प्रसिद्द समाजसेवी अशोक अरोरा एवं अरुल अरोरा ने अविनाश ग्रुप कार्यालय के बाहर नगर कीर्तन झुलुस का भव्य स्वागत किया गया। समाजसेवी अशोक अरोरा एवं उनके पुत्र अरुल अरोरा ने पंच प्यारों का दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत सम्मान किया और पवित्र गुरुग्रंथ साहिब की पुष्प चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इस दौरान समाजसेवी अशोक अरोरा के ऑफिस के बाहर भव्य आतिशबाजी के साथ पुष्पवर्षा की।
झुलुस में कोटा से आए कलाकारों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। नगर कीर्तन का भव्य झुलुस शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ नगर पालिका के सामने स्थित गुरुद्वारे पर समाप्त हुआ। नगर कीर्तन में सिख समाज के युवा, महिलाए और बुजुर्ग शामिल थे। शहर में जगह जगह नगर कीर्तन का भव्य स्वागत किया गया। गुरुद्वारे पर महाप्रसादी का आयोजन किया गया।