नीमच। सिख समाज के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ऐसे वीर संत थे, जिनकी मिसाल दुनिया के इतिहास में कम ही मिलती है। उन्होंने जुल्म के सामने कभी भी घुटने नहीं टेके और खालसा पंथ की स्थापना की। आनंदपुर साहिब में वैशाखी के अवसर पर एक धर्मसभा के दौरान उन्होंने पंच प्यारों को चुना। उनके ही निर्देश पर सिखों के लिए खालसा पंथ के प्रतीक के तौर पर 5 ककार यानी केश, कंघा, कृपाण, कच्छ और कड़ा अनिवार्य हुआ। वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह जैसे वाक्य गुरु गोविंद सिंह की वीरता को बयां करते हैं।
शहर के फोर जीरो चौराहे पर नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार ने भी नगर कीर्तन का आत्मीय स्वागत किया। विधायक परिहार ने पंच प्यारों को दुप्पटा ओढ़ाकर स्वागत कर आशीर्वाद लिया। साथ ही श्री गुरु ग्रन्थ साहिब का फूल चढ़ाकर पूजा अर्चना की।
जुलुस में कोटा से आए कलाकारों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। नगर कीर्तन का भव्य झुलुस शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ नगर पालिका के सामने स्थित गुरुद्वारे पर समाप्त हुआ। महिलाएं गुरु ग्रंथ साहब के रथ के आगे नगर कीर्तन में मार्गो पर टैंकर द्वारा डाले जा रहे पानी से झाड़ू लगाकर सफाई करते चल रही थी। नगर कीर्तन में सिख समाज के युवा, महिलाए और बुजुर्ग शामिल थे। शहर में जगह जगह नगर कीर्तन का भव्य स्वागत किया गया। गुरुद्वारे पर महाप्रसादी का आयोजन किया गया।