हिंदूत्व की आंधी को लेकर भाजपा एमपी में 29-0 के टारगेट को लेकर चल रही हैं। प्रदेश में कांग्रेस के खाते में केवल 01 सीट कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की हैं। भाजपा लगातार छिंदवाड़ा पर फोकस बनाए हुए हैं। मालवा बेल्ट की बात करें तो इस क्षेत्र में आरएसएस की मजबूत पकड़ रहती हैं। नीमच-मंदसौर संसदीय क्षेत्र को संघ की नर्सरी कहा जाता हैं। ऐसे में मालवा क्षेत्र से मुख्यमंत्री यादव, उप मुख्यमंत्री देवड़ा, और हिंदूवादी नेता कैबिनेट मंत्री विजयवर्गीय के सामने मालवा का रण कांग्रेस के लिए बेहद मुश्किल भरा होने जा रहा हैं। हालांकि मालवा क्षेत्र से ही युवा जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ बनाकर कांग्रेस ने युवा पीढ़ी के लिए सन्देश दिया हैं।
राजनीतिक जानकारों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के एकमात्र विधायक विपिन जैन को कांग्रेस लोकसभा में अपना उम्मीदवार बनाने की सोच रही थी। लेकिन विधायक जैन ने आगे रहकर लोकसभा उम्मीदवारी से मना कर दिया हैं। वहीं जावद सीट से मात्रा 2364 वोटों से हारे कांग्रेस उम्मीदवार समंदर पटेल पर भी कांग्रेस दांव आजमा रही थी। लेकिन खबरों के अनुसार समंदर पटेल ने भी लोकसभा चुनाव लड़ने से हाईकमान को मना कर दिया हैं। अब देखना यह हैं कि कांग्रेस मंदसौर लोकसभा सीट पर किस चेहरे को उतारती हैं।
वहीं राजनीतिक सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मंदसौर लोकसभा सीट से कांग्रेस की ओर से मंदसौर विधानसभा से पूर्व विधायक और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष नवकृष्ण पाटिल ने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई हैं। लेकिन पाटिल ने आलाकमान के सामने नियम व शर्ते भी रखी हैं। सबसे बड़ी शर्त हैं पार्टी फंड की। संसदीय क्षेत्र में कुल 08 विधानसभा हैं ऐसे में माने तो अनधिकृत रूप से लगभग 08 करोड़ के करीब रूपए चुनाव प्रचार में लगते हैं। अब जब बीजेपी की हिंदुत्व की आंधी चल रही हैं तो कौन जेब से इतने रूपए लगाएगा। इसलिए लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नवकृष्ण पाटिल ने पार्टी हाईकमान के सामने पार्टी फंड की शर्त रखी हैं।
हालांकि अभी हुए विधानसभा चुनाव में मंदसौर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की वोटों की हार का मार्जिन काफी कम रहा हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सुधीर गुप्ता ने कांग्रेस उम्मीदवार मिनाक्षी नटराजन को 376734 वोटों से हराया था। वहीं अभी हुए विधानसभा चुनाव में संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभा में भाजपा को कुल 800409 वोट मिले हैं और कांग्रेस को कुल 629003 वोट मिले हैं। ऐसे में मंदसौर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के हार का मार्जिन घटकर आधे से भी कम 171406 रह गया हैं। जो कांग्रेस के लिए एक सुखद खबर हो सकती हैं।
आपकों बता दें कि 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की रात पूरे देश में दीपावली मनाई जाएगी। घरों में दीपक जलाए जाएंगे, आतिशबाजी भी होगी। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सोच और मैनेजमेंट ने आयोजन को महोत्सव जैसा रूप दे दिया हैं। जिसके बाद भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना बैस पूरी तरह मजबूत कर लिया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए भाजपा को आशा अनुरूप परिणाम भी मिलने की पूर्ण संभावना हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी को राम मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह के आमंत्रण को अस्वीकार करने का खामियाजा भी इस लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।