सिंगोली। कस्बे सहित तहसील क्षेत्र में शब ए बारात का पर्व शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान क्षेत्र में जहां कब्रिस्तान और मस्जिदों को रोशन किया, वहीं रात भर दुआओं का दौर चलता रहा।
सोमवार सुबह इस आशय की जानकारी देते हुए अंजुमन कमेटी सदर रईस खान ने बताया कि शब–ए–बारात की इस्लाम में बड़ी अहमियत है। इस दिन मुसलमान पूरी रात नमाज़ और कुरआन पढ़ते है और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते है। साथ ही कबिस्तान जाकर अपने पूर्वजों की कब्रों को फूलों से सजाते है, और अल्लाह से दुआ करते है कि अल्लाह उनके गुनाहों को माफ़ करें और मरहूम को जन्नत में आला से आला मुकाम अता फरमाएं।
रईस खान ने बताया कि शब ए बारात में दो दिन रोजा रखने का भी रिवाज है। पहला रोजा शब ए बारात के दिन और दूसरा अगले दिन रखा जाता है। हालांकि ये रोजा फर्ज़ नहीं होता है। बल्कि इसे नफील रोजा कहा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन रोजा रखने से साल भर के सभी गुनाह माफ हो जाते हैं।