चित्तौड़गढ़। हमारा भारत एक ऐसा देश है जहां विभिन्न अवसर उत्सव तथा मंदिरों में अनेक नारी रतन की पूजा होती है। यह विचार कुंभा नगर में परमात्मा संदेश के साथ नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिए राजयोगिनी आशा दीदी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति महान थी और नारियों को ऊंचा ही नहीं अपितु आदरणीय और पूज्य स्थान प्राप्त था।
उन्होंने बताया की नारी जननी है, उसके हाथ में जीवन है, वह उसे जिधर चाहे मोड सकती है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में नारी का स्थान श्रेष्ठ है, चाहे वह माता है, बहन है, पत्नी है, गुरु है। इसलिए बच्चों की माता को पहला पहला गुरु भी कहा गया है। उन्होंने बताया कि नारियों में जागृति आनी चाहिए और उन्हें अपने स्वरूप स्वधर्म और स्वकर्म को पहचानना चाहिए। स्वयं को पहचानने के बिना अपनी समस्त शक्तियों का विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि नारियों को लोक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा की भी परम आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि चरित्रवान महिलाएं ही समाज में प्रतिष्ठित पद प्राप्त कर सकती है। माता गुरु के बिना संसार का कल्याण नहीं हो सकता, इसीलिए परमात्मा शिव जब धरा पर अवतरित होते हैं तो ज्ञान का कलश माता के सिर पर रखते हैं। उन्होंने बताया कि जब नारी में जागृति आती है तो सारे विश्व में चेतना आ जाती है। इसलिए कहा भी गया है जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता है रमन करते हैं।