चीताखेड़ा -5 मार्च। बसंत ऋतु दस्तक देने लगती है। ऋतुराज बसंत के आगमन पर चारों और फूलों की बहार आ जाती है इन दिनों फूलों में पलाश और सालर (हालर) के पेड़ों का फूल भी पूरी तरह से खिलकर वसंत के स्वागत के लिए आतुर हैं। यह वसंत ऋतु के आने का संकेत होता है फाल्गुन में सारा पलाश के वृक्ष नारंगी लाल रंग और हालर वृक्ष पर सफेद बर्फ एवं चांदी की तरह फूलों से ढक जाता है इन दिनों प्लस के जंगल ऐसे लगते हैं मानो सारा जंगल की आग की लपटों में धधक रहा हो। तो वहीं हालर के पेड़ों पर चांदी एवं बर्फ से ढके हुए वृक्ष सफेद फूलों से वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही सृजन का अनवरत सिलसिला एक फिर बार शुरू हुआ है। पेड़ पौधों के पुराने पत्ते पीले होकर झड़ने लगे हैं और नई कोंपले प्रकृति का श्रृंगार कर रही है। प्रकृति के इस अनूठे और अलहदा रूप को देखकर सभी के मन प्रफुल्लित हो रहे हैं।
मार्च माह के प्रारंभ में पलाश वृक्ष की शाखाओं पर काले रंग की पुष्प एवं हालर के पेड़ों पर चांदी एवं बर्फ की तरह एकदम सफ़ेद कलिकाओं के गुच्छे आने लगते हैं । खिले हुए फूलों से लदे हुए पलाश की उपमा संस्कृत लेखकों ने युद्ध भूमि से दी है। वहीं संस्कृत साहित्य में इसके सुंदर रूप का वर्णन श्रृंगार रस के लिए भी किया गया है। इन दिनों पलाश के फूल सर्वोत्तम रूप को प्रदर्शित कर रहे हैं। बसंत में खिलने वाला यह वृक्ष गर्मी की तेज तपन में भी अपनी छटा बिखेरते रहता है।