मनासा। धनुष यज्ञ भंग होने के बाद दशरथ जी जनक पुरी बारात लेकर आए। जहां पर राजा दशरथ के चारों पुत्रों का जनक की चारों पुत्रियों के साथ विवाह हुआ। बारात के अयोध्या आने पर राजा दशरथ ने अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को अयोध्या का राज पाठ देने का निर्णय लिया। राजा के इस निर्णय से पुरे अयोध्या राज्य में लोगों में खुशी छा गई। जनता नृत्य करने लगी, मिठाईयां बंटने लगी, जनता नृत्य करने लगी।
अवसर था गांव नलखेडा में चल रही 14 दिवसीय रामलीला के पांचवें दिन कलाकारों द्वारा राम वन गवन प्रसंग का। जब भगवान राम का अयोध्या का राज्याभिषेक होने की सुचना इन्द्र आदि देवताओं को लगी तो उन्होंने माता सरस्वती से विनती करते हुए कहा कि है माता आप अयोध्या जाईए व किसी भी प्रकार भगवान राम का राज्याभिषेक नहीं हो ऐसा उपाय किजिए। यदि भगवान का राज्याभिषेक हो गया तो पृथ्वी से पाप का विनाश कैसे होगा। देवताओं की विनती सुन माता सरस्वती मंथरा की जिव्हा पर बैठ गई। मंथरा राज महल पहुंची ओर रानी कैकेई के मन में राम के प्रति विष भरा। मंथरा द्वारा भरे गए विष के बाद कैकेई कोप भवन में चली गई। जहां राजा दशरथ के पहुंचने पर कैकेई ने भरत को अयोध्या का राज्याभिषेक व राम को 14 वर्ष का वनवास दो वर मांगे। कैकेई द्वारा मांगे गए वर को राजा दशरथ नही दे पाए, जब यह बात भगवान राम को पता चली तो वो स्वंय पिता की आन रखते हुए अपनी पत्नि सीता व भाई लक्ष्मण के संग वन को चले दिए। कैकेई मंथरा व दशरथ कैकेई के बीच चले संवाद ने उपस्थित जनता को आनंदित कर दिया। राजा दशरथ की भूमिका कैलाश राठोर, कैकेई सखुर डांसर, मंथरा विजय शर्मा, सरस्वती प्रदीप लोहार, सुमंत दशरथ शर्मा, कोशल्या ललीत पाटीदार, राम राहुल पाटीदार, जानकी भरत कनेरिया सहित अन्य ने निभाई।
इस अवसर पर अतिथि उप सरपंच संघ जिला अध्यक्ष किशन सिंह बोरदिया खुर्द ने कहा कि आज के युग में रामलीला होना अत्यंत आवश्यक है, गांवों से रामलीला धीरे धीरे समाप्त होने लगी हैं। युवा पीढ़ी मोबाईल में व्यस्त होती जा रही हैं। वो भारतीय संस्कृति से दूर होती जा रही हैं।युवा संस्कृति से दूर नहीं हो इसके लिए आवश्यक है कि रामलीला के आयोजन होते रहना चाहिए। साथ ही समाज सेवी मुकेश राठोर ने भी जनता को संबोधित किया।