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April 4, 2024, 4:44 pm
KHABAR : खंडवा में महिलाओं ने रखा दशामाता का व्रत, पीपल की पूजा कर लपेटा सूत, बोलीं- घर की दशा सुधरती, दरिद्रता दूर होती, पढे़ खबर

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खंडवा। गुरूवार के दिन महिलाओं ने दशा माता का व्रत रखा। कलेक्टर कार्यालय, थाना कोतवाली सहित जहां-जहां पीपल के वृक्ष थे, वहां पूजा की गई। गणगौर से पहले इस व्रत की पौराणिक ग्रंथों में काफी मान्यता है। महिलाओं ने पीपल के पेड़ की पूजा-अर्चना कर सूत लपेटा। कहा कि इस व्रत और पूजा से घर की दशा में सुधार आता है और दरिद्रता दूर होती है। पूरे दिन उपवास रखा गया है। एक समय भोजन होता है, वो भोजन भी बगैर नमक के इस्तेमाल का किया जाता है।


पंडित गणेश मार्कण्डेय बताते है कि चौत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता की पूजा अर्चना की जाती है। इस बार यह शुभ तिथि 4 अप्रैल दिन गुरुवार को है। धार्मिक मान्यता है कि दशा माता की पूजा अर्चना और व्रत करने से घर की दिशा और दशा में सुधार आता है और दरिद्रता का अंत होता है। इस दिन महिलाएं कच्चे सूत का 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गठाने लगाती हैं और फिर उसे लेकर पीपल के वृक्ष की पूजा अर्चना करती हैं। इस व्रत में डोरे का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह दशा माता का डोरा कहलाता है, जिसे महिलाएं साल भर तक गले में धारण करती हैं।


दशा माता की पूजा अर्चना के बाद महिलाएं डोरा को गले में साल भर तक धारण करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है और घर के सदस्यों की उन्नति होती है। लेकिन अगर आप साल भर तक इसको धारण नहीं कर सकते तो वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष में कोई भी अच्छा दिन देखकर माता के चरणों में अर्पित कर सकते हैं। इस व्रत में साफ सफाई का ध्यान रखना पड़ता है और घरेलू सामान व झाड़ू खरीदने का विशेष महत्व होता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, यह व्रत सभी तरह की परेशानियों से बचाता है।घरों पर हल्दी और कुमकुम के छापे लगाते है


व्रती लक्ष्मी शेखावत ने बताया कि दशा माता के व्रत में कच्चे सूत का 10 तार का डोरा लेकर उसमें 10 गठाने लगाई जाती हैं। इसके बाद महिलाएं पीपल के वृक्ष की पूजा अर्चना कर 10 बार सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं। फिर उस डोरे को गले में धारण कर लेती हैं। दशा माता की पूजा पीपल के पेड़ क छांव में किया जाता है और पीपल के आस पास धागा बांधा जाता है और फिर कथा सुनी जाती है।


पूजन करने के बाद महिलाएं घरों पर हल्दी और कुमकुम के छापे लगाती हैं। व्रत करने वाली महिलाएं एक ही समय भोजन करती हैं लेकिन उस भोजन में नमक का प्रयोग नहीं किया जाता। साथ ही भोजन में गेहूं का उपयोग किया जाता है। दशा माता का व्रत जीवन भर किया जाता है और इसका उघापन नहीं होता है।

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