नीमच। शहरवासी फिलहाल गर्मी में पेयजल संकट से हलकान हो चुके है, और अब चंद दिनों में आने वाले बारिश के मौसम को देखते हुए जलकुंभी की समस्या को लेकर निचली और पिछड़ी बस्ती के लोगों को चिंता सताने लगी है। बारिश आते ही नालों के आसपास के लोग जलकुंभी और नालों की सफाई ना होने के कारण तबाही की आशंका से भयभीत हैं। नीमच के अधिकांश हिस्सों में फैले नाले जलकुंभी से पटे पड़े हैं। इन्हें हटाने के लिए पिछले 2 सालों में कोई कारगर उपाय नहीं किए गए। केवल पोकलेन मशीन से ट्रायल कर वाहवाही बटोरने की कोशिश हुई। केमिकल से जलकुंभी हटाने की बात चली। मशीन मंगाने की डींगें हांकी गई। लेकिन समाधान शून्य हुआ। संजीवनी नाला, स्कीम नंबर 34 की रपट, प्राइवेट बस स्टैंड का नाला, नीमच सिटी पुलिया, अंबेडकर नगर और एकता कॉलोनी का नाला आदि ऐसी अनेक जगह है, जहां जलकुंभी बारिश में क्षेत्रवासियों का जीवन नर्क बना देती है। बारिश में लोगों के घरों में गंदा पानी घुस जाता है।ज़हरीले जानवर सांप,बिच्छू जलकुंभी की वजह से घरों में आ जाते हैं। जलकुंभी की वजह से नालों में मवेशियों के डूबने से बदबू फैल जाती है। लोगों के घरों का सामान और खाने पीने की वस्तुएं तबाह हो जाती है। बीमारियां विकराल रूप ले लेती है। लेकिन नगरपालिका के निर्वाचित जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता। बारिश में जलकुंभी को हटाने के नाम पर नौटंकियां होगी। बारिश से पहले समय रहते जलकुंभी हटाने की कोई राजनैतिक और प्रशासनिक इच्छा शक्ति नहीं दिखाई गई। भारतीय जनता पार्टी के नेता और वार्ड नंबर 18 के पार्षद रूपेंद्र लोक्ष ने कहा कि जलकुंभी की वजह से हमारे क्षेत्र के लोग खासे परेशान होते हैं। कई बार मौखिक और लिखित आवेदन देकर इस और ध्यान दिलाया गया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।