नीमच। देह दान पर वीरेन्द्र कुमार सखलेचा मेडिकल कॉलेज नीमच में शरीर क्रिया विज्ञान में पदस्थ सहायक प्राध्यापक डाक्टर मृदुल त्रिपाठी द्वारा स्वरचित प्रेरणादाई कविता भेजी गई है जो इस प्रकार है-
कुछ तो आए काम ये जीवन क्यो न ऐसा काम करे
हो जाए अमर ये नाम कुछ तो ऐसा काम करे
राजा हो या रंक बस खाली हाथ ही जायेगा
इस धरा का इस धरा पर सब धरा रह जायेगा
छूट जायेंगे संग और साथी सब पड़ा रह जायेगा
क्यो न मर कर अमर बने हम,कुछ तो ऐसा काम करे
बने जागरूक कहे ये हम सब, आओ देहदान करे
जीवन क्या है एक खिलौना, जिसको एक दिन खोना है
आना, जाना, हंसना,रोना ये तो जीवन भर का रोना है
जग में हो नाम हमारा क्यों न ऐसा काम करे
बने जागरूक कहे ये हम सब,आओ देहदान करे
फूल भरा ये जीवन अपना, खिल के मुरझा जाना है
मिट्टी के इस तन को फिर मिट्टी में मिल जाना है
खोल पखेरू इस चिड़िया को पल में उड़ जाना है
जग में हो नाम हमारा क्यों न ऐसा काम करे
बने जागरूक कहे ये हम सब, आओ देहदान करे
इस से बड कर दान न कोई,इसमें मान मिले, सम्मान मिले
जीवन खोकर हमको फिर से जीवन दान मिले
इसीलिए तो कहता हूं मैं आओ देह दान करें
बने जागरूक कहे ये हम सब
आओ देहदान,आओ देहदान करे
डाक्टर मृदुल त्रिपाठी
सहायक प्राध्यापक
एनाटॉमी डिपार्टमेंट
वीरेन्द्र कुमार सखलेचा मेडिकल कॉलेज नीमच मप्र