नारी हूं नारी रहने दो ,
क्यों व्यापार बनाते हो मानव ,
में भी ईश्वर की रचना हूं ,
क्यों भार बनाते हो मानव ।
नारी हूं नारी रहने दो ,
क्यों व्यापार बनाते हो मानव।।
जिस कोख से तुमने जन्म लिया,
मुझको भी वही स्थान मिला,
कर भेदभाव फिर मुझसे क्यों,
अपमान जताते हो मानव।
नारी हूं नारी रहने दो ,
क्यों व्यापार बनाते हो मानव।।
मेरा भी छोटा सा दिल है,
इस दिल के भाव अपार हैं,
करके विरोध इन भावों का ,
क्यों आग लगाते हो मानव ।
नारी हूं नारी रहने दो,
क्यों व्यापार बनाते हो मानव।।
सतयुग ने नारी को पूजा,
और दिया मान सम्मान है,
कलयुग में अब उस नारी को,
क्यों राख बनाते हो मानव ।
नारी हूं नारी रहने दो,
क्यों व्यापार बनाते हो मानव।।
बेटी भी हूं मैं बहन भी हूं,
मां बनके प्रेम अपार में दूं,
कलयुग में दानव बनके क्यों ,
मेरी लाज घटाते हो मानव।
नारी हूं नारी रहने दो,
क्यों व्यापार बनाते हो मानव।।