चित्तौड़गढ़। नव निर्मित श्री आदिनाथ जिनालय का भव्यतम श्रीमद् आदिनाथ जिनबिम्ब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के तहत रविवार 24 नवंबर को केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया गया। महोत्सव की प्रवचन सभा में अतिथि विधायक चंद्रभान सिंह आक्या सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने आचार्य सुनील सागर जी महाराज को श्रीफल भेंट कर वंदना की एवं सभी से तीर्थंकर और मुनियों के चरित्र से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष पारसमल जैन ने स्वागत उदबोधन दिया।
प्राकृत ज्ञान केसरी, प्राकृत मार्तण्ड राष्ट्र संत आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए अक्षय तृतीया के प्रसंग पर आहार दान को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए कहा कि दीन - दुखी, पीड़ित मानवता की सेवा और पशु पक्षियों की सेवा की वृत्ति सभी को अपनाना चाहिए। जीवन में दूसरों के दुखों को दूर करते हुए अन्य जीवों के मन की प्रसन्नता सबसे बड़ा उपकार है।
आहार देने का पात्र भी सदगृहस्थ
आचार्य सुनील सागर जी ने कहा कि सही अर्थाे में आहार देने का पात्र भी सदगृहस्थ होता है, जिसका व्यसनों से त्याग हो , पांच पापों से रहित हो और जो धर्म की गरिमा को बढ़ाने वाले नियमों को धारण करता हो ऐसा मानव जीवन श्रेष्ठ है।
मुनि ने कहा कि तन की जरूरत भोजन है तो जीवन की जरूरत भजन है, बिना भजन सच्चा जीवन नहीं चल सकता । मुनि श्री ने कहा कि जिनवाणी श्रवण से और धर्म कार्यों से कषायों का उपचार होता है, अस्पताल में तो सिर्फ शारीरिक रोगों का एक उपचार होता है, और धर्म कार्यों से आत्मा का जन्म जन्म तक कल्याण होता है। आपने कहा की सदाचार अपनाने और श्रेष्ठ कार्यों को करने के लिए बहाने और शिथिलाचार नहीं अपना कर सही रास्ते निकालने की आवश्यकता है। आपने कहा कि नवधा भक्ति को ध्यान में रखकर सदग्रहस्थ यदि शुद्ध भावों से केवल जल और छाछ से भी मुनियों को पारना करवा कर आहार का लाभ ले सकता है।
बेईमानी और भ्रष्टाचार के परिणाम घातक
आचार्य सुनील सागर जी ने श्कम खाओ और गम खाओश् को प्रेरक बताते हुए कहा कि बेईमानी और भ्रष्टाचार , दूसरों को धोखा देना अच्छी बात नहीं है, किसी दूसरे को के जीवन को संकट में डालकर और दूसरों को दुखी करके कोई सुखी नहीं हो सकता। अपने स्वार्थ के लिए किसी दूसरे जीव को धोखा देने वाले को इस जन्म में ही नहीं कई जन्मों तक दुख भोगना पड़ता है । आपने कहा कि जीवन में स्वार्थ और पैसे से ज्यादा कीमती है ज्ञान और आत्मा का कल्याण।
तन को नहीं मन को सजाओ
आचार्य सुनील सागर जी ने कहा कि शरीर को सजाते हैं तो दुनिया देखते हैं लेकिन यदि मां मां को सजाते हैं तो उसे परमात्मा देखा है आपने कहा कि अपने तन की सजावट के बजाय यदि मन और आत्मा को अच्छे आचार विचारों से सजाया जाएगा तो आत्मा मोक्ष गामी बन जाएगी। उन्होंने कहा की कलयुग में कुछ लोग तो अकारण ही विद्वानों और साधुओं से द्वेष रखते हैं, कई लोग व्यर्थ की बातें कर पर निंदा के दोष से मन को मालिन कर लेते हैं, यह सभी पतन की ओर ले जाने वाले कार्य हैं। इसलिए अच्छे संस्कारों को अपनाने के साथ ही आने वाली पीढ़ी को भी अच्छे संस्कारों की शिक्षा दीक्षा देने का कर्तव्य निभाना चाहिए।
मनुष्य जीवन को तराशें
मुनि श्री ने कहा कि जिस घर आंगन में किलकारियां नहीं गूंजती वह दुर्भाग्यशाली कहलाता है, लेकिन जिस घर आंगन में प्रभु भजन और सत्संग की गूंज नहीं होती वह घर महा दुर्भाग्यशाली कहलाता है। आपने कहा कि पत्थर को तरीके से तराश लेते हैं, तो वह भी भगवान की मूरत बन जाता है फिर यदि हम इंसान के जीवन को ताराशें महान क्यों नहीं बन सकेगा।
आचार्य सुनील सागर जी ने प्रेरक प्रवचनों में नवधा भक्ति का भी विस्तार पूर्वक उल्लेख करते हुए नमोस्तु, परिग्रह युक्त पाद प्रक्षालन, पूजा, मन शुद्धि, वचन शुद्धि, काया शुद्धि, आहार शुद्धि आदि के दर्शन को समझाया।
सेवा और दान कल्याणकारी
विधायक के सेवा कार्यों से प्रेरणा लें
आचार्य सुनील सागर जी महाराज ने दीक्षा कल्याणक के अवसर पर प्रवचन सभा में उपस्थित विधायक चंद्रभान सिंह आक्या द्वारा निशक्तजनों को 101 ऑटोमेटिक ट्राई साइकिल वितरण के कार्य को प्रेरणास्पद और अनुमोदनीय बताते हुए आव्हान किया कि जीवन में हर गृहस्थ को सेवा और दान का पुनीत कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित मानव और जीव सेवा से बढ़कर और कोई पुण्य नहीं।
प्रवचन सभा के पश्चात आचार्य सुनील सागर जी ने विधायक द्वारा निशक्त जन को ऑटोमेटिक ट्राईसाईकिल वितरण का शुभारंभ करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।
समिति अध्यक्ष डॉ ज्ञान सागर, महावीर रमावत, राजकुमार जैन, अनुज जैन, पूर्णेश गोधा, शैलेश पाटनी, आशा वेद, रंजना रमावत, राजकुमार बैद, सुदर्शन जैन, अनिल सेठी, पवन पाटनी आदि ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
डॉ नेमीचंद अग्रवाल ने बताया कि रविवार 24 नवंबर को केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसके तहत प्रातः 7.30 बजें दीक्षा कल्याण विधान पूजा, 9.30 बजें आहारदाता द्वारा पड़गाहन विधि एवं महामुनिराज आदिनाथ की आहारचर्या पंचाश्चर्य, दोपहर 12.30 बजें ज्ञान कल्याणक अभ्यन्तर क्रियाऐं, सूरिमंत्र, दोपहर 3 बजें ज्ञान कल्याणक पट्टोद्धाटन, शाम 7 बजें प्रतिश्ठाचार्य महावीर जैन गींगला द्वारा शास्त्र उद्बोधन तथा रात्रि में 9 बजें सांसकृतिक कार्यक्रम के तहत गीतों भरी शाम आयोजित की गई।