नीमच। नगरपालिका परेशानियों की खान है। अभी तक तो सिर्फ जनता ही परेशान थी। अब नीमच के विधायक भी इसमें शामिल हो गये हैं। कोई दो साल पहले नीमच के विधायक ने नीमच सिटी रोड स्थित सांवरियाजी मंदिर के पीछे वाले नाले पर पुल बनाने उसका सौन्दर्यीकरण करने, गोया कि उसमें नावें चलाने, फव्वारे लगाने, वगैरह वगैरह के लिये साढे तीन करोड रूपये राज्य शासन से स्वीकृत करवाकर हमारी विकासशील नगरपालिका को दिलवाए थे।
नगरपालिका ने मेहरबान होकर वह रूपये खाते में जमा रख लिए। भूमि पूजन किया, नारियल फोडा, मिठाई खाई, भाशण झाडे, चार-पांच दिन नाले पर जेसीबी मशीन से कुछ मिट्टी खोदी और फिर वह जेसीबी ऐसी गायब हुई कि आज दिनांक तक उसका कोई पता नहीं है। जनता आते-जाते उस नाले को देखती है, बाहर से आए मेहमान जो नाले की दुर्गंध से नाक सिकोडते हुए निकलते हैं उन्हें यह कहकर सफाई देते हैं कि नाले के सौन्दर्यीकरण के लिये साढे तीन करोड रूपये स्वीकृत हो गए हैं। अगली बार आएंगे तो यहां नावें और फव्वारे चलते दिखाई देंगे। दूसरे साल फिर आए मेहमान जब पूछते हैं कि क्या हुआ, यह नाला तो वैसे का वैसा ही है तो बेचारे छोटा-छोटा मुंह करके कहते हैं बस हो जाएगा, जल्दी ही, वो बारिश आ गई थी ना इसलिये काम रूक गया, बेमतलब ही शर्मिन्दा होते रहते हैं, जैसे यह काम नगरपालिका नहीं हम खुद करवा रहे है।
खेल संघों व खिलाडियों की इनडोर स्टेडियम की सतत मांग के बाद चाही गई जमीन पर तो नहीं वरन बगीचा, जो बगीचा नहीं खेत है, बगीचा नं.12 को इनडोर स्टेडियम के लिये चयन किया गया। पाठकों की सुविधा के लिये बता दूं कि यह जगह श्मशान के सामने सिटी रोड पर दरगाह के पीछे वाले हिस्से में थोडा अन्दर है, जिस पर वर्शों से खेती हो रही है।
खिलाडियों ने यह सोचकर तसल्ली कर ली कि नहीं मामा से काणां मामा अच्छा.... चलो इनडोर स्टेडियम बन तो रहा है। विधायकजी ने भी इनडोर स्टेडियम के लिये राज्य शासन से तीन करोड रूपए स्वीकृत करवाकर हमारे यहां के धनधान्य से परिपूर्ण माने जाने वाली नगरपालिका को दिलवा दिए। नगरपालिका ने उसे भी अपने खाते में उदारता दिखाते हुए जमा कर पटक दिये।
हमारे विधायकजी ने इन दो कार्यों के लिये साढे 6 करोड रूपये स्वीकृत करवाये थे तो जाहिर है कि अपने भाशणों में वह इसका उल्लेख करेंगे ही और ऐसा उन्होंने किया भी, पर समय गुजरता गया। विधायकजी के साथ साथ नीमच की जनता भी दोनों प्रोजेक्ट का इन्तजार करते रहे परन्तु हमारी नगरपालिका को इन छोटे मोटे कार्यों के लिये फुर्सत कहां ? वह तो मकानों के एमओएस के उल्लंघन, गरीबों के ठेले-गुमटियां हटवाने, दशहरा मैदान को बर्बाद करने, अपने पराये पार्शदों को समेटकर रखने, कौन सी जमीन कहां खाली है उसको कैसे ठिकाने लगाना है, जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगी हुई है। उसे तो भले ही नाले में बच्चे डूबकर मर जाएं, वहां रेलिंग व जाली लगाने तक का समय नहीं है। खेलों की चिंता इतनी है कि खराब पडे डॉ.राजेन्द्रप्रसाद स्टेडियम के मैदान की मिट्टी भी नहीं बदला सकी, जिससे वहां वर्शभर खेल हो सकें। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की परेड भी इस खराबी के कारण क्रमांक 2 स्कूल में होने लगी।
खैर हाल फिलहाल तो हम हमारे विधायकजी की बात करें। उन्होंने जिन कार्यों के लिये धनराशि स्वीकृत करवाकर नगरपालिका को दिलवाई है, जाहिर है कि नगरपालिका से उस काम की बाबत पूछा भी होगा, काम शुरू नहीं होने पर पूछा भी होगा। यह तो उन्हीं की पार्टी की नगरपालिका है तो कई मौकों पर चर्चा भी हुई होगी। विधायकजी ने अपने कई भाशणों में इन कार्यों का उल्लेख किया है तो जनता भी पूछती होगी कि यह काम कब होंगे। जनता के सामने तो यह कहते होंगे कि जल्दी होगा, पर मन ही मन कुढते होंगे कि काम क्यों नहीं हो सका ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार आखिरकार हमारे विधायकजी का धैर्य जवाब दे ही गया। उन्होंने दिल पर पत्थर रखकर आखिर विधानसभा में प्रश्न पूछ लिया कि उक्त दोनों कार्यों पर प्रश्न पूछने के दिनांक तक कितनी राशि खर्च की जा चुकी है एवज में कितना काम हुआ है इसका भौतिक सत्यापन वगैरह-वगैरह और नीमच नगरपालिका की अनदेखी के लिये यह कार्य इनसे लेकर अन्य एजेन्सी के माध्यम से करवाया जाए।
सोचिए कि अपनी ही पार्टी की नगरपालिका के कार्यों को लेकर विधानसभा में विधायक को सवाल करना पडे तो नगरपालिका की कार्यप्रणाली क्या होगी ?
नीमच की जनता तो इस महान नगरपालिका की महान करतूतों से परेशान है ही, अब तो विधायक भी परेशान हैं।
’’सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यूं है
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं है।’’