सरवानिया महाराज। जिले में पश्चिमी देश अमेरिका से आई रबी, खरीफ और गर्मी के सीजन की फसल किनोवा का बड़ी मात्रा में इस बार रकबा बोया गया तो है लेकिन यह फसल अब किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है। आम तौर पर किन्वा यानी कि किनोवा की फसल दक्षिण अमेरिका, पेरु, बोलिविलिया और चेरु जेसे विदेशी देशों की फसल है लेकिन उन्नत कृषि तकनीकी खोज ने इस फसल को भारत में लाकर किसानों के बीच खड़ा कर दिया। बड़े पैमाने पर अब नीमच जिले में किसानों द्वारा इस का रकबा बोया जाने लगा है। इस रबी के सीजन में किनोवा की फसल के शुरुवाती दिनों में तो सब ठीक ठाक रहा लेकिन अब जैसे ही फसल पकने लगी है और बड़ी मात्रा में इस फसल पर इल्लियों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। बड़ी मात्रा में इल्लियों के इस प्रकोप से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें तन रही है। किसान बालकिशन धनगर ने बताया कि इस बार किनोवा की फसल में फसल पकने की स्थति में बड़ी संख्या में इल्लियों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। वहीं कृषि दवाईयों के एक्सपर्ट नरेंद्र कुमार भट्ट ने बताया कि इस बार किनोवा में इल्लियों की शिकायत देखने को मिल रही है और एकमात्र हल है एंटी इल्ली दवा स्प्रे। इस बार खरीफ सीजन में फसलों को घिंडोरा किट द्वारा चट कर जाने की खबरें भी आई थी। ग्राम चढ़ोली के एक किसान ने बताया कि पहली बार प्याज़ की जड़ों में छोटे छोटे किड़े देखे गए हैं।
किनोवा की फसल एक धान की तरह है जिससे रोटी और चावल सुप आदि की तरह खाया जाता है। मुख्य रूप से यह सफेद लाल और काले रंग में पाया जाता है जिसमें चावल से दौगुना प्रोटीन मक्का से दौगुना फाईबर तथा गैंहू से तीन गुना वसा पाया जाता है। यह नो प्रकार के एमिनो एसिड प्रोटीन और एंटी ऑक्सीडेंट पायें जाते हैं।