नीमच। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर स्कीम नंबर 36 ए पर गीता जयंती के महापर्व पर परम पूज्य गुरुदेव राष्ट्रीय संत श्री मिथिलेश जी नगर के मुखारविंद से गीता के ज्ञान को अपने जीवन में किस प्रकार से आत्मसात किया जाए पर पर मार्मिक प्रवचन देते हुए बताया कि आज के सांसारिक जीवन के अंदर गीता हमें केवल आध्यात्मिकज मार्गदर्शन नहीं देती है अपीतु हमें जीवन के हर पहलू में संतुलित करने की शिक्षा देती है यह शोध केवल पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान का प्रयास है। बल्कि युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने की प्रेरणा देता है। भावना का यह कदम दिखता है कि यदि हम अपने प्राचीन ग्रंथ ज्ञान को आधुनिक समस्याऔ के समाधान के लिए उपयोग करें। तो एक सकारात्मक भविष्य का निर्माण संभव है। जीवन में हमारा क्या लक्ष्य है वह गीता ज्ञान से सफलतापूर्वक अर्जित किया जा सकता है। गुरुदेव ने बताया कि गीता की शिक्षाओं को समाज की समस्या से समाधान के लिए कैसे लागू किया जा सकता है। और युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण एवं विकास में श्रीमद् भागवत गीता से प्रेरणा ली जा सकती है। इसे जाना जासकता है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार को गीता भागवत शिक्षा के पाठ्यक्रम में लागू करने के लिए अनुसंधान करते हुए उसे उन्हें आने वाली युवा पीढ़ी के लिए समावेश कर पढ़ना चाहिए। जिसमें निस्वार्थ भाव से समाज नैतिकता आदर्श और संस्कार प्रमुख होगा। महाभारत युद्ध के बाद श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन को गीता ज्ञान दिया था। और आज की युवा पीढ़ी को भी गीता का ज्ञान लेते हुए धर्म संस्कृति और भारत की सभ्यताओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा लेनी चाहिए। एवं गीता के उपदेश को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। इस कार्यक्रम की प्रेरणा सौत्रों सोनाली गौड़ एवं राजकुमारी राठौर के द्वारा एक महीने से कॉलोनी के अंदर गीता के बारे में बच्चों एवं मातृ शक्तियों को एकत्रित करके परी चर्चा करी जा रही थी एवं उनको गीता के उपदेश के बारे में बताया जा रहा था।
इस अवसर पर वार्ड पार्षद भारत सिंह अहीर, सोहनलाल पुरोहित, सुरेश चंद बंसल, अनिल पांडेय, अशोक जिंदल, अशोक चौहान, प्रभु लाल जोशी, रमेश जायसवाल, दिनेश मानावत, पंडित दिनेश शर्मा, एवं मातृशक्ति इंदिरा पांडेय, संध्या राठी, अनुराधा मोदी, चौहान, संगीता जादव, नेहा टेलर, एवं 36 ए के धर्म प्रेमी बंधु की उपस्थिति में गीता जयंती कार्यक्रम संपन्न हुआ कार्यक्रम का संचालन ललित कुमार राठी ने किया