चित्तौड़गढ़। बोजुन्दा पॉलिटेक्निक कॉलेज के समीप स्थित श्री कालभैरव (श्री काला जी बावजी) देव स्थल पर कैलेंडर वर्ष की विदाई और स्वागत में सनातन संस्कृति से ओतप्रोत संगीतमय नानी बाई का मायरा और भव्य भजन संध्या के आयोजन 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक आयोजित होंगे। इस अभिनंदन 2025 आयोजन में आशीर्वाद प्रदान करने सूरजकुंड वाले संत अवधेश चौतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज सहित अन्य संत शिरकत करेंगे। जबकि मेवाड़ के प्रख्यात शंकर लक्खा एण्ड पार्टी द्वारा संगीत मय नानी बाई का मायरा और भजन संध्या की प्रस्तुति दी जाएगी।
यह जानकारी देते हुए पुजारी बाबूलाल जटिया सतखंडा ने बताया कि बोजुंदा पॉलिटेक्निक कॉलेज के समीप स्थित श्री काल भैरव मंदिर पर आयोजन के तहत 30 दिसंबर को दोपहर एक बजे से नानी बाई का मायरा का शुभारंभ होगा, जो 31 दिसंबर और 1 जनवरी को प्रतिदिन दोपहर एक बजे से सायंकाल बजे तक किया जाएगा। जबकि नव वर्ष के अभिनंदन स्वरूप 31 दिसंबर की रात्रि मंदिर पर विशाल रात्रि जागरण भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। समापन 1 जनवरी 2025 को दोपहर एक बजे नानी बाई का मायरा कथा के पश्चात विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में होगा। श्रद्धालुओं ने आयोजन में आशीर्वाद प्रदान करने के लिए सूरजकुंड वाले स्वामी अवधेश चौतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज व अन्य संतों से भेंट की, उन्होंने स्वीकृति प्रदान की है।
उल्लेखनीय है कि थर्टी फर्स्ट व कैलेंडर नव वर्ष पर होने वाले पाश्चात्य , फूहड़ आयोजन व पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण को रोकने और सनातन संस्कृति के पवित्र संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित हो रहे इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में भक्ति भाव की रसधारा बहेगी। श्री काल भैरव मंदिर पर तीन दिवसीय आयोजन की तैयारी की जा रही है, आयोजन में आसपास सहित सुदुरस्थ क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे।
स्मरणीय है कि अति प्राचीन श्री काल भैरव ( श्री काला बावजी) मंदिर युगादि चमत्कारिक देवस्थल है। यहां प्रत्येक शनिवार को बावजी की गादी लगती है, और माह की प्रत्येक अष्टमी को श्री कालिका माता जी की महाआरती की जाती है।
इस धर्म स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का वर्ष भर आवागमन रहता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है, और दैहिक, दैविक, भौतिक कष्टों से मुक्ति भी मिलती है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले के आसपास ही नहीं, बल्कि राजस्थान सहित मुंबई, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों से यहां श्रद्धालु आते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति पर धन्य होते हैं।