नीमच। महाकवि गोपालदास नीरज की सौवीं जयन्ती के उपलक्ष्य में नगर की अग्रणीय साहित्यिक सांस्कृतिक, सामाजिक संस्था कृति द्वारा नीरज की आदरांजली में साहित्य व संगीत का मिला-जुला कार्यक्रम ‘‘नीरज निशा‘‘ दिगम्बर जैन मांगलिक भवन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में चेन्नई से आए साहित्यकार, लेखक कवि एवं पुष्पाजंली पत्रिका के सम्पादक गोविन्द मूंदड़ा ने नीरज की शैली में नीरज की कविताओं से श्रोताओं को विभोर कर दिया। गोविन्द मूंदड़ा ने आदमी को ‘‘आदमी बनाने के लिए, जिन्दगी में प्यार की कहानी चाहिये‘‘। चल ओघट घाट पे यार जरा, क्या रखा है आलमगीरी में। ‘‘अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।‘‘ और ऐसी क्या बात है चलता हूॅ अभी चलता हूॅ गीत एक और जरा झूम के गा लू तो चलू।‘‘ जैसी कालजयी रचनाओं का सस्वर पाठ किया।
काव्य पाठ के पश्चात नीरज के फिल्मी गीतों का कार्यक्रम हुआ। जिसमें बाबू तूफान, राजेन्द्र भंवरेला, महेश शर्मा एवं विद्या जैन ने आज मदहोश हुआ जाए रे, खिलते हैं गुल यहां, कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे आदि गीतों की प्रस्तुती दी।
कार्यक्रम के आरम्भ में अतिथि स्वागत के बाद कृति के अध्यक्ष बाबूलाल गौड़ ने स्वागत भाषण व कैलाश बाहेती ने अतिथि परिचय दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन मंजुला धीर ने किया। आभार संस्था के सचिव महेन्द्र त्रिवेदी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में किशोर जेवरिया, रघुनंदन पाराशर, प्रकाश भटृ, डा. माधुरी चौरसिया, डा. जीवन कोशिक, सत्येन्द्र सक्सेना, राजेश जायसवाल, भरत जाजू, डा. पृथ्वीसिंह वर्मा, अनिल चौरसिया, प्रेमप्रकाश जैन, माणकचन्द्र बिड़ला, राजेश मानव, जगदीश लोगड़, डा. साधन सेवक, प्रियका कविश्वर, धर्मेन्द्र शर्मा, जम्बूकुमार जैन, घनश्याम अम्ब, नीरज पोरवाल, सत्यनारायण पाराशर, सुरेन्द्र सन्नाटा, खजानसिंह पंवार, जगदीशचन्द्र शर्मा, राजमल व्यास, दिलीप मित्तल, योगेश पाटीदार, सुशील पगारिया आदि कई सुधी श्रोता उपस्थित थे।